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Chandrapur

चंद्रपुर मनपा आयुक्त की जांच के लिए मुख्यमंत्री की टिप्पणी, उपमुख्यमंत्री ने भी लिया संज्ञान


चंद्रपुर: चंद्रपुर शहर के एक नगरसेवक के कथित अवैध निर्माण को संरक्षण देने और न्यायालय के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप अब चंद्रपुर महानगरपालिका के आयुक्त अकुनुरी नरेश पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। भानापेठ मोहल्ला स्थित नगरसेवक राहुल चौधरी के कथित अवैध निर्माण और मनपा प्रशासन की लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वयं शिकायत पत्र पर “तत्काल जांच की जाए” ऐसी टिप्पणी दर्ज की है। इसके बाद मंत्रालय के नगर विकास विभाग में इस मामले को लेकर तेज़ी से हलचल शुरू हो गई है।

चंद्रपुर निवासी पंकज किशोर चौधरी (35) ने मुंबई स्थित मंत्रालय पहुंचकर यह शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भानापेठ मोहल्ला स्थित शीट नंबर 43, संपत्ति क्रमांक 4763, जो उनके दादा मंगल चौधरी की संपत्ति है, उस पर नगरसेवक राहुल चौधरी ने कथित रूप से फर्जी एवं भ्रामक शपथपत्र तैयार कर मनपा की अनुमति के बिना अवैध निर्माण किया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं। इसके अलावा वरिष्ठ दिवानी न्यायालय द्वारा 5 मई 2025 को स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी किया गया था तथा मनपा के सहायक आयुक्त ने 26 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस भी जारी की थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मनपा आयुक्त ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और अप्रत्यक्ष रूप से निर्माण को संरक्षण दिया। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

‘महाराष्ट्र सिविल सेवा नियम 1979’ के तहत आयुक्त पर कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में मांग की है कि नगरसेवक के दबाव में आकर कर्तव्य में लापरवाही बरतने तथा अवैध निर्माण को संरक्षण देने के आरोपों की विभागीय आयुक्त के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, मनपा आयुक्त के खिलाफ ‘महाराष्ट्र सिविल सेवा नियम 1979’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा शिकायत पत्र पर “तत्काल जांच की जाए” की टिप्पणी करते हुए मामले को आगे की कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग को भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे अब मनपा आयुक्त की भूमिका की औपचारिक जांच का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।