किसानों के पास खाने तक के पैसे नहीं और 700 करोड़ का जॉगिंग ट्रैक बनाया जा रहा, वडेट्टीवार बोले- वसूली करने आए तो पकड़कर मारो
नागपुर: महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति, किसानों की कर्ज वसूली, विद्यार्थियों की फीस और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सूखे से परेशान किसानों के पास खाने के लिए अनाज नहीं है और उनके बच्चों के पास कॉलेज की फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ पुणे में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से 700 करोड़ रुपये का जॉगिंग ट्रैक बनाने के लिए निविदा निकाली जा रही है। वडेट्टीवार ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में 'अंधेरी नगरी, चौपट राजा' जैसी स्थिति बन गई है।
नागपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वडेट्टीवार ने किसानों की समस्याओं से लेकर युवाओं के आंदोलन, चुनाव आयोग, सत्तारूढ़ महायुति में कथित मतभेद, गन्ने के दाम और अवैध जुआ अड्डों जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की। इसी बीच, सूखे के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में छत्रपति संभाजीनगर में कांग्रेस के 'जनआक्रोश सूखा मोर्चा' के आयोजन की भी जानकारी दी गई।
जबरन कर्ज वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बैंकों, पतसंस्थाओं और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की ओर से की जा रही कथित जबरन कर्ज वसूली को लेकर वडेट्टीवार ने नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्ज पुनर्गठन के आदेश जारी करने की बात कह रही है, लेकिन अकोला सहित कई जिलों में वसूली करने वाले लोग किसानों के घरों तक पहुंच रहे हैं और महिलाओं की तस्वीरें खींच रहे हैं।
वडेट्टीवार ने कहा कि पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों पर इस तरह दबाव बनाना अनुचित है। उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई जबरन वसूली के लिए आए या महिलाओं को परेशान करे, तो वे इसकी शिकायत करें। उन्होंने पीड़ित किसानों को सीधे फोन करने की बात भी कही और आश्वासन दिया कि वे उनके साथ खड़े रहेंगे।
विद्यार्थियों की फीस माफी पर उठाए सवाल
वडेट्टीवार ने सूखा प्रभावित किसानों के बच्चों की शैक्षणिक फीस माफी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उनका आरोप है कि सरकार ने केवल 300 से 400 रुपये तक की परीक्षा फीस माफ करने का शासन निर्णय जारी किया है, जबकि इंजीनियरिंग, मेडिकल, एमएससी और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस एक लाख से तीन लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा हॉस्टल का खर्च भी विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेतों में फसल नहीं हुई और किसान आर्थिक संकट में हैं, तो वे इतनी बड़ी फीस कहां से भरेंगे? वडेट्टीवार के मुताबिक, फीस भरने के लिए कॉलेजों की ओर से दबाव बनाए जाने के कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की सहायता की मांग
किसानों को मिलने वाली सूखा राहत का मुद्दा उठाते हुए वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र सरकार की तुलना कर्नाटक से की। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में सूखा राहत की राशि किसानों के खातों में जमा की गई है, जबकि महाराष्ट्र के किसानों को अब तक अपेक्षित सहायता नहीं मिली है। उन्होंने सरकार से पंचनामों की प्रक्रिया में उलझने के बजाय दिवाली से पहले सूखा प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की सहायता देने की मांग की।
महायुति के दलों में चल रहा कोल्डवार
महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति में कथित अंदरूनी खींचतान को लेकर वडेट्टीवार ने दावा किया कि मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बीच संवाद की कमी है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे की नाराजगी को लेकर बैठकें हो रही हैं और तीनों दलों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे के विभागों की फाइलें रोक रहे हैं। उनके अनुसार, सत्ता में बने रहने के लिए आपसी खींचतान के कारण राज्य के कामकाज पर असर पड़ रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गन्ने को 5 हजार रुपये प्रति टन क्यों नहीं?
गन्ने के उचित मूल्य के मुद्दे पर वडेट्टीवार ने किसानों के लिए 5,000 रुपये प्रति टन की दर की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब चीनी की कीमत 28 रुपये प्रति किलो थी, तब गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) लगभग 3,100 रुपये था। अब बाजार में चीनी की कीमत 55 रुपये प्रति किलो होने के बावजूद गन्ने के लिए 5,000 रुपये प्रति टन की मांग पूरी नहीं होना किसानों के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी की मांग का समर्थन करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी निशाना साधा। वडेट्टीवार ने कहा कि किसानों के सामने आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बच रहा है।
चावल घोटाले की जांच और अवैध जुआ अड्डों का मुद्दा
गोंदिया जिले मेंचावल घोटाले का मामला उठाते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि उनकी शिकायत के बाद विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। उन्होंने मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा, गडचिरोली के सीमावर्ती क्षेत्रों में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आने वाले लोगों के माध्यम से सोशल क्लब के नाम पर कथित तौर पर चल रहे अवैध जुआ अड्डों का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। वडेट्टीवार ने कहा कि इन अड्डों को बंद कराने के लिए वे पुलिस महानिदेशक और गृह मंत्री को पत्र लिखेंगे।
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