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Buldhana

मुआवजे को लेकर आंदोलन कर रहे थे किसान, तभी युवक ने पानी में कूद ली जल समाधि; वीडियो वायरल


बुलढाणा: बुलढाणा जिले में जिगांव परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा पाने के लिए किसान पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। हालाँकि, इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्रता दिवस पर एक किसान विनोद पवार ने सीधे पानी में कूदकरगया। नदी में पानी का बहाव इतना तेज था कि, किसान उसमें बह गया। इस घटना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

क्या है पूरा मामला? 

जिले के जलगांव-जामोद तहसील के निर्मित जिगांव परियोजना में प्रभावित किसान पिछले कई साल से पुनर्वसन सहित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालाँकि, इसको लेकर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। इसी को लेकर स्वतंत्र दिन के मौके पर फिर एक बाद किसानों ने आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान एक किसान ने नदी में झलांग लगा दी। नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण वह बह गया। जिस समय यह घटना हुई उस समय सैकड़ो की संख्या में लोग वहां मौजूद थे ,लेकिन इस दौरान किसी ने भी व्यक्ति को रोकने का प्रयास नहीं किया, बल्कि सभी वीडियो बनाते रहे। हालांकि, जब व्यक्ति गया तब लोगों ने उसे बचाने के लिए गोहर लगाई। हालांकि, तब तक युवक पानी के बहाव में बह चूका था। 


इस संबंध में राजनीति भी शुरू हो गई है। महाविकास अघाड़ी के नेता सरकार पर हमलावर हैं। विधायक रोहित पवार ने इसे बेहद दुखद, शर्मनाक और आक्रोशपूर्ण घटना बताया है। इस बीच, कांग्रेस नेता यशोमति ठाकुर ने इस मामले पर सरकार पर निशाना साधा है। रोहित पवार ने इस मामले में जल विसर्जन करने वाले विनोद पवार के परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी मांग की है। क्या अब सरकार जागेगी? उन्होंने यह सवाल उठाया है।

सरकार कब तक ऐसा व्यवहार करती रहेगी? 

रोहित पवार ने अपनी पोस्ट में कहा कि एक ओर जहाँ देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, वहीं दूसरी ओर बुलढाणा जिले में जिगांव परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवज़ा पाने के लिए परियोजना प्रभावित किसान विनोद पवार ने आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल दुखद है, बल्कि राजनेताओं के लिए बेहद शर्मनाक और आक्रोशित करने वाली भी है।  किसान पिछले पाँच वर्षों से नए गाँव थाना मार्ग के पुनर्वास की माँग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने इसमें देरी की। ज़िला कलेक्टर को भ्रष्ट गिरोह में शामिल न होकर जिगांव परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों की तुरंत जाँच कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए और पवार परिवार की मदद करनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, "परियोजना प्रभावितों को वर्षों से उनके हक़ का मुआवज़ा क्यों नहीं मिल रहा है? मेरे निर्वाचन क्षेत्र, कुकड़ी परियोजना सहित, राज्य में कई जगहों पर यही स्थिति है। क्या सरकार किसानों के प्राण त्यागने के बाद ही जागेगी? सरकार कब तक ऐसा ही व्यवहार करती रहेगी?"

किसानों का शिकार कर रही सरकार

कांग्रेस नेता यशोमति ठाकुर ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, "यह आज़ादी किस बात की...?" गौलखेड (तालाब, जलगांव जामोद, ज़िला बुलढाणा) के किसानों ने जीगांव सिंचाई परियोजना के लिए अधिग्रहित ज़मीन का मुआवज़ा पाने के लिए जल विसर्जन आंदोलन किया। एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना तब घटी जब इस आंदोलन में शामिल किसान विनोद पवार ने पूर्णा नदी में कूदकर जल विसर्जन कर लिया। यह सरकार महायुति सरकार है जो बलिराजा की शिकार है।