'रवि भवन' में गैस संकट! कैंटीन में चूल्हे ठंडे, अब बिजली के भरोसे पक रहा खाना
नागपुर: महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर के सबसे महत्वपूर्ण सरकारी पते 'रवि भवन' से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के मंत्रियों, दिग्गज नेताओं और आला अधिकारियों के अस्थायी निवास माने जाने वाले रवि भवन की कैंटीन में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है। हालात इतने खराब हैं कि कैंटीन प्रशासन को अब अधिकारियों का पेट भरने के लिए इलेक्ट्रिक ग्रिल और हीटरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वीआईपी इलाके में 'हड़कंप'
रवि भवन वह इलाका है जहाँ विदर्भ और नागपुर दौरे पर आने वाले मंत्रियों के सरकारी बंगले हैं। महत्वपूर्ण बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों का यह केंद्र अब गैस की कमी से जूझ रहा है। सप्लाई सिस्टम में आई इस रुकावट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाधान के लिए 'इलेक्ट्रिक ग्रिल' का सहारा
कैंटीन मैनेजमेंट ने स्थिति को संभालने के लिए आनन-फानन में चार इलेक्ट्रिक ग्रिल मंगवाए हैं।
- आपूर्ति में बाधा: कैंटीन स्टाफ के अनुसार, उन्हें नियमित सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं और फिलहाल केवल दो आधे भरे सिलेंडरों से काम चलाना पड़ रहा है।
- दोगुना हुआ समय: गैस की कमी का सीधा असर सर्विस पर पड़ा है। जो डिश गैस पर 10 मिनट में तैयार होती थी, उसे इलेक्ट्रिक ग्रिल पर पकाने में अब 20 मिनट लग रहे हैं। इससे ऑर्डर सर्व करने की रफ्तार धीमी हो गई है।
होटल-रेस्टोरेंट में लौटे 'लकड़ी के चूल्हे'
गैस की यह किल्लत सिर्फ रवि भवन तक सीमित नहीं है। नागपुर शहर के कई होटलों और रेस्टोरेंट्स में भी कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत देखी जा रही है। कई ढाबों और छोटे होटलों ने मजबूरन दोबारा लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे शहर में पुराने दौर जैसी तस्वीरें दिखने लगी हैं।
बढ़ रहा है संकट का डर
यदि कमर्शियल गैस की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो शहर के अन्य सरकारी संस्थानों, अस्पतालों और निजी कैंटीनों में भी खाद्य आपूर्ति ठप होने का डर जताया जा रहा है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब मंत्रियों के इलाके में यह हाल है, तो आम जनता और छोटे व्यापारियों का क्या होगा?
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