logo_banner
Breaking
  • ⁕ Shardiya Navratri 2026: नागपुर सहित विदर्भ में नवरात्रि की धूम, देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ त्योहारों पर नागपुर और न्यू अमरावती के यात्रियों को बड़ी राहत, मध्य रेलवे चलाएगा विशेष ट्रेनें ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Nagpur

Lok Sabha Election 2024: जब विधायक की बहन का नाम ही वोटिंग लिस्ट से कटा


नागपुर: नागपुर लोकसभा सीट (Nagpur Parliamentary Consistency) पर मतदान समाप्त ही गया है। तमाम कोशिशों के बावजूद सीट पर केवल 54.33 प्रतिशत मतदान हुआ। कम मतदान को लेकर कई तरह की वजह सामने आई हैं। हालांकि, सबसे प्रमुख कारण मतदान सूची में नामों का काटना और मौजूद नामों में गड़बड़ी रही। आम जनता तो छोड़िए, विधायक के परिवार का भी नाम वोटिंग लिस्ट से कट गया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और विधान परिषद् के विधायक प्रवीण दटके (MLA Pravin Datke) को लोकसभा चुनाव के लिए नागपुर सीट का प्रभारी बनाया गया था। जिसके तहत दटके पर चुनाव का सफल प्रबंधन करना और मतदान केंद्र तक लोगों को लाना था। हालांकि, मतदान के दिन जैसे ही वोटिंग लिस्ट सामने आई तमाम प्रबंधन धरे के धरे रह गए। 

दटके के परिवार का वोटिंग मध्य नागपुर के दक्षिणमूर्ति चौक स्थित एक स्कुल में था। दटके की बड़ी बहन प्रणीति दटके जैसे ही मतदान करने के लिए केंद्र पर पहुंची तो उनका नाम सूची से गायब दिखा। वहीं जांच करने पर डिलीट सूची में उनका नाम दिखाई दिया। यही नहीं, सूची में उनके पति की जगह पिता का नाम दिखाई दिया। यह केवल एक मामला है, पुरे लोकसभा क्षेत्र में करीब पांच लाख मतदाताओं के नामों में गलती सामने आई है।

चुनाव के लिए आयोग द्वारा छह महीने पहले से मतदान सूची तैयार करने का काम किया जाता है। इस दौरान आयोग द्वारा सही जानकारी और हर मापदंड का पालन करने की बात कहता है। लेकिन मतदान सूची के बाहर आने के बाद आयोग द्वारा किये सारे दावे केवल दावे रह गए।