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जाती की राजनीति में कूदे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बताया इन चार जातियां का विकास करना ही मेरा मकसद


नई दिल्ली: देश में जाती की राजनीति कोई नहीं बात नहीं है। देश में जब से संविधान लागू हुआ है तब से ही राजनीति में जातियों का मुद्दा अहम रहा है। वहीं एक बार फिर देश में जातियों को लेकर राजनीति बढ़ती जा रही है। 1990 की तर्ज पर विपक्षी एक बार फिर इस मुद्दे को हवा देने में लगे हुए हैं। कांग्रेस समेत तमाम नेता लगातार जाति जनगड़ना की मांग कर रहे हैं। विपक्ष की इस जातीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कूद गए हैं। उन्होंने बताया कि, देश की किस चार जातियों का विकास करना है।"

गुरुवार को प्रधान मंत्री ने कहा, "विकसित भारत का संकल्प चार अमृत स्तम्भों पर मजबूती के साथ टिका हुआ है। इन्ही अमृत स्तम्भों पर हमें ध्यान केंद्रित करना है। यह अमृत स्तम्भ है हमारी नारीशक्ति, हमारी युवा शक्ति, हमारे किसान और हमारे गरीब परिवार।" 

पीएम ने कहा, "मेरे लिए देश की सबसे बढ़ी चार जातियां हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी जाति है- गरीब, युवा, महिलाएं और किसान है। इन चार जातियों का उत्थान ही मेरे लिए सबसे बड़ा काम है। इनका अगर विकास हो गया तो सभी का विकास हो जाएगा।"

उन्होंने कहा, "जन्म से कोई भी हो, अगर वह गरीब है उसका जीवन स्तर हमें सुधारना है। उसे गरीबी से बाहर निकालना है। इस देश का कोई भी युवा चाहे उसकी जाती कोई भी हो मुझे उसके रोजगार के स्वरोजगार के अवसर देने हैं। इस देश की कोई भी महिला भले उसकी कोई भी जाति की हो उसे शशक्त करना है। उसके जीवन से मुश्किलें कम करनी है। उसके सपने जो दबे पड़े हैं। उन सपनों को पंख देनी है। संकल्प से भरना है और सिद्धि तक उसके साथ रहकर उसके सपने को पूरा करूँगा।"

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "इस देश का किसी भी जाती का किसान मुझे उसकी आय बढ़ानी है। मुझे उसका समर्थ बढ़ाना है। उसकी खेती को आधुनिक बनाना है। उसकी फसल को ज्यादा पैदा करने वाला बनाना है।" मोदी ने कहा, "इन चार जातियों को जब तक बाहर नहीं निकाल लूंगा तब तक चैन से नहीं बैठूंगा। आप मुझे इतनी शक्ति दीजिये जिससे मैं इन्हे पूरा कर सकूँ। क्योंकि, जब यह चार जाती शसक्त होंगे तब पूरा देश शसक्त हो जाएगा।"