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Nagpur

पेड़ो की कटाई पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने मनपा को लगाई फटकार, 10 सालों में काटे और लगाए पेड़ो की ऑडिट रिपोर्ट देने का दिया निर्देश


नागपुर: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने पेड़ों की कटाई और प्रतिपूरक वृक्षारोपण के संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। पेड़ों को काटने की अनुमति देने से पहले प्रतिपूरक वृक्षारोपण की शर्त शामिल करना आवश्यक है। यह नियम सार्वजनिक और निजी परियोजनाओं पर लागू होगा।

कोर्ट ने पाया कि 2019 से 2025 तक नागपुर में 6356 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी। दावा किया गया कि मुआवजे के तौर पर 89308 पौधे लगाए गए। लेकिन उनके जीवित रहने और रखरखाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है। प्रीति पटेल और तीन अन्य नागरिकों द्वारा नागपुर पीठ में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ट्री एक्ट के प्रावधानों का पालन किए बिना नागपुर शहर के विकास के लिए 1374 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है।

न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे और न्यायमूर्ति वृषाली जोशी के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध अनुमति और वृक्षारोपण पर 10 साल का डेटा मांगा। वास्तव में कितने पेड़ लगाए गए और उनका अस्तित्व है, यह स्पष्ट करने के लिए कोई डेटा प्रदान नहीं किया गया है। पेड़ों को काटने की अनुमति में प्रतिपूरक वृक्षारोपण की शर्त शामिल है। लेकिन पेड़ लगे हैं या नहीं और उनका सर्वाइवल रेट क्या है, इसकी कोई मॉनिटरिंग या ऑडिट नहीं होता।

कोर्ट ने आदेश दिया कि पेड़ों को काटने की अनुमति देने के साथ ही अनुमति लेकर अनिवार्य रूप से प्रतिपूरक वृक्षारोपण करना होगा। इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति या प्राधिकरण को वृक्ष अधिकारियों को शपथ पत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट ने नगर निगम को पिछले 10 वर्षों के वृक्षों की कटाई और वृक्षारोपण का डेटा शपथ पत्र के साथ 13 जून 2025 तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मृणाल चक्रवर्ती और नगर निगम की ओर से अधिवक्ता जेमिनी कासट ने बहस की। जियो टैगिंग का सुझाव कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि लगाए गए पेड़ों की 7 वर्षों तक देखभाल करनी होगी। यह जिम्मेदारी उस व्यक्ति या प्राधिकरण की होगी, जिसे अनुमति दी गई है। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि नए पेड़ों की जियो टैगिंग की जानी चाहिए, ताकि उनकी मॉनिटरिंग पारदर्शी हो सके।