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किसान प्रदर्शन पर बच्छू कडू को हाई कोर्ट की फटकार, कहा- आंदोलन के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं; भविष्य में संयमित बयान की नसीहत


नागपुर: बॉम्बे हाई कोट की नागपुर खंडपीठ ने किसान आंदोलन को लेकर पूर्व विधायक बच्छू कडू की विवादित टिप्पणियों पर सख्त नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका हमेशा जनता के अधिकारों और किसानों के हितों की रक्षक रही है, लेकिन किसी भी आंदोलन के नाम पर अराजकता या जनजीवन ठप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह "किसान विरोधी" नहीं, बल्कि "अव्यवस्था विरोधी" है। 

किसान आंदोलन को लेकर पूर्व विधायक बच्छू कडू द्वारा न्यायपालिका की भूमिका पर की गई गंभीर और विवादित टिप्पणियों पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अदालत ने कहा कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान न केवल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं।

बच्छू कडू ने आरोप लगाया था कि जब किसान एक दिन सड़क पर उतरते हैं तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाता है, जबकि जब वही किसान आत्महत्या करते हैं तो कोई आवाज नहीं उठाता। इस पर अदालत ने तीखा सवाल किया कि क्या अदालतों ने कभी किसानों के पक्ष में फैसले नहीं दिए? न्यायालय ने कहा कि किसानों के मुद्दों पर कई ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं, जिनसे किसानों को राहत मिली है, इसलिए यह कहना कि न्यायपालिका किसान विरोधी है, बिल्कुल अनुचित है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आंदोलन के अधिकार का सम्मान करते हुए भी यह नहीं भुलाया जा सकता कि सड़कों के अवरोध और जनजीवन की बाधा से आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है। ऐसे में किसी भी आंदोलन को अनुशासन और मर्यादा में रहकर ही किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत जवाबों पर अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भविष्य में ऐसे आंदोलनों के दौरान नागरिकों की सुविधा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। साथ ही अदालत ने बच्छू कडू को सलाह दी कि न्यायपालिका पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की गहराई को समझें और अपने बयानों में संयम रखें।

हाई कोर्ट ने अंत में यह भी दोहराया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन यह अधिकार जिम्मेदारी के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि न्याय और जनहित दोनों की मर्यादा बनी रहे।