सत्ता से बाहर होते ही बौखला गए विपक्षी! चंद्रशेखर बावनकुले बोले- देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे विरोधी दल
नागपुर: चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में विपक्षी दलों के आंदोलन और विधान परिषद चुनाव में महायुति की स्थिति को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से बाहर होने के बाद विपक्षी दल बौखला गए हैं और समाज में नकारात्मकता फैलाकर देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान बावनकुले ने विपक्ष के आंदोलन पर सवाल उठाए और विधान परिषद चुनाव में महायुति की जीत का भरोसा जताया।
महायुति की ही जीत होगी: बावनकुले
विधान परिषद चुनाव में एक सीट को लेकर भाजपा और शिवसेना के शिंदे गुट के बीच मुकाबले की स्थिति बनी हुई है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन दिए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। इस पर बावनकुले ने कहा कि महायुति की चार सीटों पर पहले ही सहमति बन चुकी थी। हालांकि, एक सीट को लेकर बातचीत में कुछ मतभेद सामने आए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सीट पर महायुति के घटक दल भले ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ें, लेकिन अंतिम जीत महायुति की ही होगी।
चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन पर विपक्ष को घेरा
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन और तिरंगा रैली को लेकर बावनकुले ने विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सत्ता से बाहर होने के कारण नकारात्मक राजनीति कर रहा है और समाज में अविश्वास का माहौल पैदा करना चाहता है।
बावनकुले के मुताबिक, विपक्ष ने पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर सवाल उठाए, फिर मतदाता सूचियों को लेकर आपत्तियां जताईं और अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष का उद्देश्य नकारात्मकता फैलाकर दोबारा सत्ता हासिल करना है।
संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर भी लगाए आरोप
बावनकुले ने विपक्ष पर संविधान और आरक्षण को लेकर लोगों के बीच डर पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को संविधान बदलने तथा आरक्षण समाप्त होने की आशंका दिखाकर गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक शक्तियां समाज में जातिगत तनाव बढ़ाकर देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहती हैं। बावनकुले ने इसे हिंदुत्ववादी विचारधारा के विरोध से भी जोड़कर देखा।
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