चंद्रपुर विवाद पर वडेट्टीवार की समझदारी! बोले- सुरेंद्र अड़बाले ही रहेंगे गुट नेता, कुछ लोगों के कारण उनके और धानोरकर के बीच हुए मतभेद
नागपुर/चंद्रपुर: चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी और उठापटक के बीच अब सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। विभागीय आयुक्त द्वारा सांसद प्रतिभा धानोरकर के समर्थक सुरेंद्र अड़बाले को गुटनेता पद से हटाकर राजेश अडूर को नियुक्त किए जाने के बाद विवाद गहरा गया था। हालांकि, अब कांग्रेस नेता ने इस फैसले पर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा है कि गुटनेता सुरेंद्र अड़बाले ही रहेंगे और जल्द ही राजेश अडूर से इस्तीफा लिया जाएगा। साथ ही प्रतिभा धानोरकर को छोटी बहन बताते हुए आपसी गलतफहमी दूर होने और मिलकर काम करने की बात भी कही है।
उन्होंने आगे कहा, "राजनीति में किसी को किसी का दुश्मन नहीं होना चाहिए। बालू धानोरकर को मैंने ही राजनीति में आगे लाया था। कुछ लोगों के कारण हमारे बीच मतभेद पैदा हुए। प्रतिभा धानोरकर भी हमारे लिए भाभी समान हैं। हम इस मामले में नहीं पड़ना चाहते। हमें महाराष्ट्र की राजनीति करनी है और पूरे प्रदेश में घूमकर काम करना है।"
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "अपने जिले में आपसी मतभेद नहीं होंगे तो बेहतर होगा। हमें कांग्रेस को एक मजबूत संगठन के रूप में खड़ा करना है और सरकार के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़नी है।"
क्या है पूरा विवाद?
चंद्रपुर महानगरपालिका के 15 जनवरी 2026 को हुए आम चुनाव में कांग्रेस के 27 नगरसेवक निर्वाचित हुए थे। 6 फरवरी 2026 को सर्वसम्मति से राजेश अडूर को गुट नेता चुना गया था। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद 16 जून 2026 को 16 नगरसेवकों ने एकजुट होकर सुरेंद्र अडबाले के नाम का प्रस्ताव प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद 21 जुलाई 2026 को प्रशासन ने अडबाले के नाम को गुटनेता के रूप में दर्ज कर लिया। इस फैसले को चुनौती देते हुए राजेश अडूर और उनके 10 समर्थक नगरसेवकों ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की थी।
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