कॉर्पोरेट जिहाद के मुद्दे पर विजय वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा, अशोक खरात मामले पर दोहरा मापदंड अपनाने का लगाया आरोप
नासिक: महाराष्ट्र की राजनीति में नासिक के 'कॉर्पोरेट जिहाद' मामले और ढोंगी बाबा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के कद्दावर नेता विजय वडेट्टीवार ने सत्ताधारी महायुति सरकार और प्रशासन पर दोहरा मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
वडेट्टीवार ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि अशोक खरात की जगह कोई मुस्लिम आरोपी होता, तो अब तक पूरे समुदाय को निशाना बनाया जा चुका होता और उनकी 'वरात' निकाल दी गई होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध को जाति या धर्म के चश्मे से देखना गलत है और जो व्यक्ति गलत है, उसे गलत कहने की हिम्मत समाज में होनी चाहिए।
राजनीतिक टिप्पणियों के साथ-साथ वडेट्टीवार ने राज्य के कृषि संकट पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी को महज एक 'बनवाबनवी' और किसानों के साथ धोखा करार दिया। वडेट्टीवार के अनुसार, जब तक किसानों का 7/12 (भूमि रिकॉर्ड) पूरी तरह से कर्जमुक्त नहीं हो जाता, तब तक इसे वास्तविक राहत नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल बीमा योजना के जरिए केवल निजी बीमा कंपनियों की जेबें भरी जा रही हैं, जबकि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित असली किसान आज भी सरकारी मदद के लिए तरस रहा है।
अंत में, विपक्षी गुट के नेताओं और सांसदों की मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से बढ़ती मुलाकातों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए सत्तापक्ष के प्रमुखों से मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर लग रहे 'समय न देने' के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ठाकरे हमेशा संवाद के लिए उपलब्ध रहते हैं। वडेट्टीवार ने फिलहाल महाविकास अघाड़ी में किसी भी बड़े बिखराव की संभावना से इनकार किया है, हालांकि उन्होंने दबे स्वर में कुछ सांसदों के पाला बदलने को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा।
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