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कौन बनेगा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री? शपथग्रहण की तैयारी हुई शुरू, लेकिन नाम पर सस्पेंस कायम


मुंबई: महायुति (Mahayuti) ने प्रचंड जित हासिल करते हुए राज्य की सत्ता में दोबारा वापसी की है। महायुति की राज्य में 233 सीटें आई हैं, वहीं महाविकास अघाड़ी (Mahavikas Aghadi) केवल 46 सीट ही जीत पाई है। राज्य में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद सरकार स्थापना को लेकर तैयार भी शुरू हो गई है। वानखेड़े स्टेडियम में कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई है। लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री कौन होगा इसको लेकर तस्वीर साफ़ नहीं हो पाई है। भाजपा (BJP), शिवसेना (Shivsena) सहित एनसीपी (NCP) तीनों दलों के नेता अपना-अपना मुख्यमंत्री हो इसको लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। 

महायुति को प्रचंड बहुमत मिलने और भाजपा की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद यह चर्चा शुरू है कि, आखिर मुख्यमंत्री कौन बनेगा? भाजपा, शिवसेना के तय नीति के तहत जिसकी सबसे ज्यादा सीट होगी उसका मुख्यमंत्री होगा। तय नीति के तहत माने में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, कायदे से भाजपा का मुख्यमंत्री होना चाहिए लेकिन इसके बावजूद गठबंधन में कुछ तय नहीं हो पा रहा है। 

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हो या अजित पवार सभी कह रहे हैं कि, हमारे यहाँ मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और शिंदे सहित अजित पवार मिलकर बैठेंगे और तय करेंगे की किसका मुख्यमंत्री होगा। 

तीनों दलों के बीच मुख्यमंत्री को लेकर पेंच 

राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भाजपा चाहती है कि, उसका मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। भाजपा नेताओं और विधायकों की मांग है कि, देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। उनका कहना है कि, राज्य में भाजपा को बहुमत मिला है उसके पीछे देवेंद्र फडणवीस प्रमुख सूत्रधार है। इसलिए उन्हें ही राज्य का मुखिया बनाया जाना चाहिए।" वहीं एकनाथ शिंदे के समर्थको का भी अपना तर्क है। उनका कहना है कि, राज्य में जो सत्ता लौटी है उसके पीछे शिंदे का काम है।

लोकसभा चुनाव का उदारहण देते हुए कहा कि, "महायुति ने शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ा उसी का परिणाम है इतनी बड़ी जीत मिली है। इसलिए शिंदे को कंटीन्यू किया जाना चाहिए।" भाजपा शिवसेना के बाद एनसीपी नेताओं के भी अपने तर्क है। उनका कहना है कि, अजित पवार गठबंधन के बेहद प्रमुख नेता है। विधानसभा चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत के पीछे उनकी भी मेहनत है। इसलिए उन्हें भी मौका मिलना चाहिए।"

26 नवंबर को सरकार का कार्यकाल हो रहा समाप्त 

राज्य की मौजूदा सरकार का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है। संविधान के मुताबिक 26 नवंबर के पहले नई सरकार का गठन करना जरुरी है। अगर ऐसा नहीं किया जाता या इसमें देरी होती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता है। हालांकि, महायुति के नेता 26 तारीख के पहले सरकार गठन करने की बात कह रहे हैं।