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Yavatmal: वणी ग्रामीण अस्पताल में सर्पदंश के मरीज को पीठ पर ले जाने का वीडियो वायरल; बदइंतजामी के आरोपों पर अस्पताल प्रशासन ने पेश की असलियत


यवतमाल: यवतमाल जिले के वणी स्थित ग्रामीण अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। वीडियो में परिजन एक सर्पदंश पीड़ित मरीज को पीठ पर लादकर वार्ड से बाहर एम्बुलेंस की ओर ले जाते दिख रहे हैं। वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे और आरोप लगाया गया कि अस्पताल में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर उपलब्ध न होने के कारण परिजनों को यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन सभी दावों का खंडन करते हुए पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है।

खेत में काम के दौरान डसा था सांप
जानकारी के अनुसार, भालर निवासी 43 वर्षीय विजय आनंदराव हेपट को खेत में काम करने के दौरान जहरीले सांप ने डस लिया था। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए वणी के ग्रामीण अस्पताल लेकर पहुंचे। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया और आवश्यक दवाएं दीं। हालांकि, मरीज की हालत नाजुक होने और स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर व उन्नत उपचार के लिए चंद्रपुर के बड़े अस्पताल में रेफर करने का निर्णय लिया।

स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की पेशकश
रेफर किए जाने के बाद जब मरीज को एम्बुलेंस तक ले जाने का समय आया, तो अस्पताल स्टाफ ने स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की व्यवस्था की। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी स्पष्टीकरण और वीडियो की ऑडियो जांच के अनुसार, ड्यूटी पर मौजूद नर्स और वॉर्डबॉय परिजनों से लगातार अनुरोध कर रहे थे कि मरीज को पीठ पर न ले जाएं, बल्कि स्ट्रेचर या व्हीलचेयर का इस्तेमाल करें।

इसके बावजूद, जल्दबाजी और घबराहट के माहौल में मरीज के साथ आए रिश्तेदारों व दोस्तों ने स्टाफ की बात अनसुनी कर दी और मरीज को अपनी पीठ पर उठाकर बाहर ले जाने की जिद पर अड़े रहे।

अस्पताल की छवि खराब करने की साजिश का आरोप
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मौके पर सभी बुनियादी सुविधाएं और जरूरी उपकरण मौजूद थे। प्रशासन ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर पूरी घटना का एकतरफा और अधूरा वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे भ्रामक दावों के साथ सोशल मीडिया पर फैलाया। प्रशासन के मुताबिक, इस तरह के अधूरे वीडियो से स्वास्थ्यकर्मियों के मनोबल पर असर पड़ता है और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की छवि बेवजह धूमिल करने की कोशिश की जाती है।