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Amravati

Amravati: तळेगाव ठाकुर में बारिश के लिए निकाली गई पारंपरिक 'धोंडी', किसानों ने लगाई भगवान से गुहार


अमरावती: अमरावती जिले के तिवसा तहसील के तळेगाव ठाकुर इलाके में पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण खरीफ की फसल संकट में आ गई है। शुरुआती बारिश के भरोसे किसानों ने सोयाबीन, कपास और अरहर (तुअर) जैसी फसलों की बुआई तो कर दी, लेकिन उसके बाद मानसून के रूठ जाने से फसलों की बढ़त रुक गई है और कई जगहों पर पौधे सूखने की कगार पर हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक आस्था और लोक संस्कृति को सहेजते हुए 'धोंडी' निकाली और ईश्वर से जल्द बारिश कराने की आर्त प्रार्थना की।

कड़वे नीम की पत्तियां और मेंढक बांधकर निकाली फेरी
माळेगाव के धोंडीधारक जितेश सनिशे के नेतृत्व में भगवान सावंत, सागर सावंत और कई युवाओं ने इस पारंपरिक आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार, धोंडीधारक ने अपने शरीर पर कड़वे नीम की डालियां और एक मेंढक बांधकर पूरे गांव में फेरी निकाली। इस दौरान उनके साथ चल रहे युवा ग्रामीणों से अनाज के रूप में चंदा इकट्ठा कर रहे थे। गांव की महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने भी इस लोक परंपरा में शामिल होकर धोंडीधारक पर पानी डाला, अनाज अर्पित किया और अच्छी बारिश के लिए दुआ मांगी।

पारंपरिक गीतों से गूंज उठा पूरा गांव
गांव की विभिन्न गलियों से जब यह जुलूस निकला, तो युवाओं ने पारंपरिक लोक धुन में जयघोष किया, "धोंडी धोंडी पाणी दे, दाय दाना पिकू दे, शेतमाऊली पिकू दे, गाय-वासरूले चारा दे..." (अर्थात: हे धोंडी महाराज, पानी दो, खेतों में अन्न और फसलें पकने दो, गाय-बछड़ों को चारा मिलने दो)। इस जयघोष से पूरे गांव में एक भावुक और भक्तिमय माहौल बन गया। ग्रामीणों ने घरों से बाहर आकर धोंडी का स्वागत किया और सामूहिक रूप से मानसून की जल्द वापसी की प्रार्थना की।

सूख रही हैं फसलें, किसानों पर दोबारा बुआई का संकट
इस साल मानसून की शुरुआत में संतोषजनक बारिश होने से किसानों ने बड़ी उम्मीदों के साथ खरीफ की बुआई की थी। लेकिन अब बारिश में लंबा गैप आने की वजह से फसलों की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ रहा है। खेतों में पर्याप्त नमी न होने से फसलें सूखने लगी हैं। अगर अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई, तो किसानों के सामने दोबारा बुआई (दुबार पेरणी) का बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। महंगे बीज, खाद और मजदूरी के कारण किसान पहले ही कर्ज और तंगी से जूझ रहे हैं, ऐसे में अब उनकी पूरी उम्मीद सिर्फ और सिर्फ आसमान से बरसने वाली राहत पर टिकी है।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पुराने समय में जब भी अकाल जैसी स्थिति बनती थी, तब 'धोंडी' निकालने की परंपरा थी। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने वाली एक समृद्ध लोक परंपरा है। इस आयोजन से गांव में एक बार फिर उम्मीद जगी है और सभी की नजरें आसमान की ओर लगी हैं कि जल्द ही झमाझम बारिश हो, ताकि सूखती फसलों को जीवनदान मिल सके।