Amravati: सादगी से हुई युवा स्वाभिमान पक्ष की दहीहंडी, बाल गोपालों ने फोड़ी मटकी
अमरावती: अमरावती में हर साल दहीहंडी का उत्साह डीजे, ढोल-ताशों और गगनभेदी जल्लोष के साथ देखने को मिलता है, लेकिन इस बार जिला स्त्री अस्पताल में हुई दर्दनाक घटना के चलते युवा स्वाभिमान पक्ष ने दहीहंडी उत्सव बेहद सादगी से मनाया। बिना डीजे, बिना पटाखों और बिना किसी गाजे-बाजे के बाल गोपालों ने दहीहंडी फोड़ी। आयोजकों का कहना है कि उत्सव के साथ समाज के दुख को भी समझना जरूरी है। इसी सामाजिक संवेदनशीलता और मानवता को ध्यान में रखते हुए इस बार विदर्भ स्तरीय दहीहंडी का आयोजन सादगी से किया गया।
इस आयोजन के दौरान विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए करीब 50 लाख रुपये का निधि खर्च किया गया। जिला स्त्री अस्पताल में जिन बच्चों की मौत हुई, उनके परिवारों को प्रत्येक दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। वहीं अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को भी प्रत्येक 51 हजार रुपये की सहायता दी गई। दहीहंडी के साथ कई अन्य सामाजिक उपयोगी कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
रवी राणा का उद्धव ठाकरे पर निशाना
कार्यक्रम के दौरान विधायक रवी राणा ने शिवसेना ठाकरे गुट की उपनेता सुषमा अंधारे और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे पर जमकर निशाना साधा। अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल में हुई बाल मृत्यु की घटना को लेकर उन्होंने ठाकरे गुट पर राजनीति करने का आरोप लगाया। रवी राणा ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे और ठाकरे गुट को पीड़ित और गरीब परिवारों की वास्तव में चिंता होती, तो सुषमा अंधारे के जरिए उन परिवारों तक आर्थिक मदद पहुंचाई जाती। लेकिन मदद करने के बजाय इस संवेदनशील मामले पर राजनीति की जा रही है, ऐसा आरोप उन्होंने लगाया।
सुषमा अंधारे को लेकर भी राणा का हमला
रवी राणा ने सुषमा अंधारे पर हिंदू देवी-देवताओं और बालासाहेब ठाकरे को लेकर पूर्व में दिए गए बयानों का हवाला देते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमरावती अंबा देवी और एकवीरा माता की पवित्र भूमि है और ऐसे में यहां आकर धार्मिक स्थलों और उनके विकास पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
हनुमान चालीसा विवाद का जिक्र करते हुए राणा ने उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों पर टिप्पणी करने के लिए ऐसे नेताओं को आगे किया जा रहा है और इसे लेकर उन्होंने ठाकरे गुट की विचारधारा पर सवाल उठाए। दहीहंडी के मंच से रवी राणा ने साफ कहा कि इस बार उत्सव भले ही सादगी से मनाया गया हो, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता का संदेश पूरे विदर्भ तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
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