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Amravati

नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवक से ठगी, नागपुर के एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज


अमरावती: स्कूल में नौकरी लगवाने के नाम पर एक युवक से 17 लाख रुपये लेने और छह साल तक बिना पगार के काम कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले पीड़ित ने   ओंकार मल्टीपरपज एजुकेशन सोसाइटी नागपुर के अध्यक्ष ओंकार भाऊराव अंजीकर के खिलाफ पांचपावली थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। 

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित चैतन्य मंगलकर, मुलता अमरावती निवासी, पढ़ा लिखा होने के बावजूद उसे नौकरी नहीं लग रही थी। 2016 में जब वह जय हिंद विद्यालय, गुलशन नगर नागपुर में नौकरी की तलाश में गया। जहां उसकी मुलाकात तत्कालीन प्रधानाध्यापिका ममता कराडे हुए। कराडे ने युवक को ओंकार मल्टीपरपज एजुकेशन सोसाइटी नागपुर के अध्यक्ष ओंकार भाऊराव अंजीकर के पास भेजा। इस मुलाकात में अंजीकर ने कहा कि हमारे स्कूल में 80 प्रतिशत सरकारी अनुदान से चल रही है और अगले साल तक यह 100 प्रतिशत अनुदानित हो जाएगी।" अंजिकार ने आगे कहा कि, हम युवक को अपनी संस्था में नौकरी देंगे, हालांकि, इसके लिए उसे 20 लाख रुपये देंगे होंगे। 

छह साल तक बिना वेतन के करवाया काम

नौकरी के लिए पैसे की मांग करने पर युवक अपने घर लौट आया। इसके बाद अंजिकर ने तीन-चार बार फोन कर युवक के माता पिता से बात की और लड़के को नौकरी पक्की करने का मौका दोबारा नहीं आएगा और चार-छह महीने में उसका वेतन शुरू हो जाएगा। यह कह कर झांसे में ले लिया। बेटे की सरकारी नौकरी लगने के लालच में चैतन्य मंगलकर के पिता ने आरोपी को 17 लाख 55 हजार रुपये दे दिए। पैसे मिलने के बाद आरोपी ने युवक को एसबीके उच्च प्राथमिक विद्या मंदिर, यादव नगर नागपुर में लगभग 6 वर्षों तक बिना किसी शासकीय आदेश पत्र व बिना पारिश्रमिक के काम कराया। वहीं वेतन सहित नियुक्त पत्र की मांग करने पर वह टालमटोल करने लगता। 

शिकायत दर्ज नहीं करने का बनाया दवाब

अध्यक्ष ओंकार अंजिकर और तत्कालीन प्रधानाध्यापिका ममता ताई कराडे द्वारा ठगी की साजिश रचे जाने की बात पता चलने पर बेटे की नौकरी के लिए दिए गए सत्रह लाख पचास हजार रुपये बार-बार वापस करने की गुहार लगाने पर ओंकार अंजीकर ने पांच-पांच लाख के दो चेक दिए, लेकिन बैंक में पैसे नहीं होने के कारण वह चेक बाउंस हो गए। पैसे नहीं मिलने के को लेकर पीड़ित ने आरोप के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने की बात कही। इसके बाद आरोपी ने आरटीजीएस के माध्यम से 12 लाख रुपये पीड़ित को लौटाए। वहीं बाकी पैसो की मांग पर वह  कल देता कह कर टाल-मटोल करने लगा। इसी दौरान बुटीबोरी के स्वामी विवेकानंद विद्यालय के ऋषि काले ने बार-बार फ़ोन कर पुलिस में शिकायत नहीं करने का दवाब बनाया।

संस्था की जांच और मान्यता रद्द करने की मांग

बार-बार टालमटोल करने से त्रस्त होकर पीड़ित ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं इस मामले को लेकर पीड़ित ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर और संबंधित शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कर कराइ है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में आरोपी के संस्था की जांच करने और मान्यता रद्द करने की मांग की है।