logo_banner
Breaking
  • ⁕ जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए 5 फरवरी को होगा का मतदान, 7 को मतगणना, दो चरणों में होगा चुनाव ⁕
  • ⁕ राज्य चुनाव आयोग ने ‘लाडली बहन योजना’ का लाभ अग्रिम रूप से देने पर लगाई रोक ⁕
  • ⁕ Nagpur: क्राइम ब्रांच की छापा मार कार्रवाई, साढ़े पाँच लाख का प्रतिबंधित गुटखा–तंबाकू जब्त ⁕
  • ⁕ Nagpur: नायलॉन मांजा पर हाईकोर्ट सख्त, पतंग उड़ाने पर 25,000 और बेचने पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना ⁕
  • ⁕ मनपा चुनाव के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार; सुरक्षा और तकनीकी इंतज़ाम पुख्ता, दोपहर तक परिणाम की संभावना ⁕
  • ⁕ मनपा चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन, रैलियों और जनसभाओं के ज़रिए प्रत्याशी झोंकेंगे पूरी ⁕
  • ⁕ प्रचार के अंतिम दिन भाजपा ने झोंकी पूरी ताक़त; फडणवीस निकाल रहे बाइक रैली, गडकरी और बावनकुले की जनसभाओं से मांगे जाएंगे वोट ⁕
  • ⁕ चांदी के भाव में उछाल का दौर जारी; नागपुर सराफा बाजार में 2,53,500 प्रति किलो पर पहुंची चांदी ⁕
  • ⁕ Bhandara: लाखोरी गांव के पास घूम रहे तीन भालू, इलाके में डर का माहौल ⁕
  • ⁕ Nagpur: नकली एमडी बिक्री विवाद में युवक पर जान लेवा हमला, चाकू मार कर किया गंभीर रूप से घायल ⁕
Bhandara

Bhandara: पत्ता गोभी को नहीं मिल रहा था भाव, किसान ने खड़ी फसल पर चलाया ट्रैक्टर


भंडारा: बाजार में सब्जियों के दामों में लगातार गिरावट जारी है। जिससे किसान बड़ी मुश्किल में आ गये हैं। बाजार में फसलों के सही भाव नहीं मिलते देख किसान अब अपनी फसलों को नष्ट करने में लग गए हैं। ऐसा ही एक मामला जिले के लाखनी तहसील से सामने आया है। जहां बाजार में पत्ता गोभी के सही दाम नहीं मिलने से आहत किसान ने पूरी फसल पर ट्रैक्टर चलाने का मामला सामने आया है।

मिली जानकारी के अनुसार, लाखनी तहसील के पालंदुर गांव के टीकाराम भुसारी ने डेढ़ एकड़ में सब्जी की फसल उगाते हैं। जिसमे भिंडी, फूलगोभी, गोभी, करेला, बैंगन जैसी सब्जियां लगाई गई हैं। वहीं आधा एकड़ में पत्ता गोभी लगाई गई ह। पिछले 15 दिनों से सब्जियों की कटाई जारी है। सब्जियों की कटाई के बाद किसान भोयर पत्ता गोभी को बाजार में बेचने लेकर गया। जहां 80 किलो पत्ता गोभी की कीमत 200 रूपये तय हुई। यानि प्रति किलो ढाई रूपसे से भी कम।

लागत भी नहीं निकली

फसलों को भाव नहीं मिलने और लगत को नहीं निकलते देख किसान ने आहत होकर आधा एकड़ में लगी पूरी फसल पर ट्रेक्टर चला दिया। भाव नहीं मिलने और लगत को कम करने के लिए किसान लगातर सुनियोजित तौर पर खेती कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद फसल को कीमत नहीं मिल रही है।