Chandrapur: 4 महिलाओं की मौत के बाद आदमखोर बाघिन कैद, लेकिन जंगल का खौफ अब भी जिंदा
चंद्रपुर: सिंदेवाही के गुंजेवाही वन क्षेत्र में चार महिलाओं की जान लेने वाली आदमखोर ‘टी-2’ बाघिन को आखिरकार वन विभाग ने पकड़ लिया है। शनिवार रात पवनपार बीट के कक्ष क्रमांक 282 में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान वन विभाग की टीम ने ट्रेंकुलाइजिंग डार्ट की मदद से बाघिन को बेहोश कर काबू में किया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में कुछ हद तक राहत जरूर है, लेकिन मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर लोगों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है।
लगातार चार महिलाओं की मौत के बाद वन विभाग पर भारी दबाव था। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के आदेश के बाद विशेष अभियान शुरू किया गया। बाघिन की पहचान के लिए इलाके में 3 लाइव कैमरे और करीब 30 ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। शनिवार शाम करीब सवा सात बजे खोजी टीम को बाघिन दिखाई दी, जिसके बाद सटीक डार्ट मारकर उसे बेहोश किया गया। शुरुआती अंधेरे में कुछ देर भ्रम की स्थिति रही, लेकिन जांच में पुष्टि हुई कि पकड़ी गई बाघिन वही ‘टी-2’ है, जिसने महिलाओं पर हमला किया था। रात करीब 8 बजे उसे पूरी तरह कैद कर लिया गया।
पेट पालने जंगल जाते हैं, मौत साथ लौटती है
सिंदेवाही तालुका के ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह जंगल पर निर्भर है। फरवरी-मार्च में महुआ बीनना और मई-जून में तेंदूपत्ता इकट्ठा करना यहां के गरीब परिवारों की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा है। लेकिन यही जंगल अब उनके लिए मौत का मैदान बनता जा रहा है।
महुआ बीनने के लिए ग्रामीण सुबह अंधेरे में जंगल पहुंचते हैं, जब हिंसक जानवरों की गतिविधियां सबसे ज्यादा होती हैं। वहीं तेंदूपत्ता इकट्ठा करने के दौरान भी लोगों को कई किलोमीटर पैदल जंगल के भीतर जाना पड़ता है। इसी तेंदूपत्ता सीजन में चार महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। ग्रामीणों का सवाल है कि, “अगर रोजी-रोटी कमाने जंगल जाना ही मौत को दावत देना है, तो आखिर गरीब जाएं तो जाएं कहां?”
खेतों में भी मंडरा रहा मौत का साया
सिर्फ जंगल ही नहीं, सिंदेवाही के खेतों में काम करने वाले किसान भी लगातार डर के साए में जी रहे हैं। घने जंगलों से लगे खेतों में काम करते समय किसानों को हर पल यह डर सताता है कि पता नहीं कब और कहां से बाघ हमला कर दे। स्थानीय किसानों का कहना है कि खेत में झुककर काम करते वक्त हर आवाज डर पैदा करती है। खेती अब सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है।
“वही ढाक के तीन पात”, लोगों का फूटा गुस्सा
हालांकि ‘टी-2’ बाघिन को पकड़ लिया गया है, लेकिन सिंदेवाही के लोगों का कहना है कि हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। पहले बाघ हमला करता है, लोगों की जान जाती है, फिर वन विभाग अभियान चलाता है और कुछ दिनों बाद फिर कोई दूसरा बाघ हमला कर देता है। लोगों ने प्रशासन और नेताओं पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर घटना के बाद सिर्फ दौरे, भाषण और आश्वासन मिलते हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकला।
अब सिंदेवाही के नागरिकों की मांग है कि सिर्फ बाघ पकड़ने तक सीमित रहने के बजाय सरकार और प्रशासन मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालीन योजना बनाए, ताकि जंगल पर निर्भर मजदूरों और किसानों को सुरक्षित जीवन मिल सके।
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