विदर्भ में हाथियों का तांडव: इंसानों और हाथियों के खूनी संघर्ष पर विधानसभा में भारी हंगामा; सरकार को उपाय योजना पेश करने के निर्देश
चंद्रपुर/गडचिरोली/नागपुर/मुंबई: विदर्भ (Vidarbha) के चंद्रपुर (Chandrapur) और गढ़चिरौली जिलों (Gadchiroli District) में मानव और वन्यजीव (हाथी) का संघर्ष अब बेहद जानलेवा और चिंताजनक मोड़ पर पहुंच चुका है। जंगली हाथियों के हमलों में लगातार हो रही मौतों को लेकर आज महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) में भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार (VIjay Wadettiwar) ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार से केवल कागजी कार्रवाई छोड़ तुरंत 'विशेष टास्क फोर्स' (Special Task Force) गठित करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर (Rahul Narvekar) ने भी सरकार को इस पर तुरंत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
दौड़ा-दौड़ा कर युवक को हाथी ने पैर से कुचला
विजय वडेट्टीवार ने सदन में 2 जुलाई को घटित एक अत्यंत हृदयविदारक घटना का जिक्र किया। उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले चंद्रपुर जिले के सावली तालुका में, व्याहाड-सोनापुर मार्ग पर 30 वर्षीय युवक अतुल गोहने पर एक जंगली हाथी ने हमला कर दिया। अतुल ने अपनी जान बचाने के लिए भागने की पूरी कोशिश की, लेकिन बेकाबू हाथी ने उसका पीछा किया और उसे जमीन पर पटककर जागीच कुचल दिया। इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरे इलाके के ग्रामीणों में दहशत और भारी आक्रोश का माहौल है।
32 हाथियों का झुंड, वन विभाग का चल रहा है 'खो-खो' का खेल
सदन को संबोधित करते हुए वडेट्टीवार ने बताया कि इस समय 30 से 32 जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिलों में लगातार तबाही मचा रहा है। इस झुंड ने अब तक सैकड़ों घर, झोपड़ियां और किसानों की फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।
वन विभाग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "वन विभाग केवल हाथियों को भगाने का दिखावा कर रहा है। जब हाथी गढ़चिरौली से खदेड़े जाते हैं तो वे चंद्रपुर आ जाते हैं, और जब चंद्रपुर से भगाए जाते हैं तो वापस गढ़चिरौली चले जाते हैं। वन विभाग का यह 'खो-खो' का खेल चल रहा है, लेकिन किसी के पास इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं है।" उन्होंने दावा किया कि जंगलों में बढ़ते खनन (माइनिंग) और इंसानी दखल के कारण हाथियों के पारंपरिक रास्ते बदल गए हैं, जिसकी वजह से वे बस्तियों का रुख कर रहे हैं।
विजय वडेट्टीवार की सरकार से प्रमुख मांगें:
- हाथी-मानव संघर्ष से निपटने के लिए मैदानी वन कर्मियों को आधुनिक और विशेष ट्रेनिंग दी जाए।
- ड्रोन और आधुनिक सैटेलाइट ट्रैकिंग तकनीक के जरिए हाथियों के झुंड की लोकेशन पर 24 घंटे नजर रखी जाए।
- हाथियों के गांवों या खेतों की तरफ बढ़ने से पहले ही ग्रामीणों को अलर्ट करने के लिए एक स्वचालित 'इशारा प्रणाली' (Early Warning System) खड़ी की जाए।
- इस पूरी समस्या को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए तत्काल विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की एक 'विशेष टास्क फोर्स' बनाई जाए।
विधानसभा अध्यक्ष भी दिखे सख्त; सरकार को दी चेतावनी
सदन में इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भी कड़ा रुख अपनाया। अध्यक्ष ने कहा, "आज के आधुनिक युग में जब इतनी बेहतरीन तकनीक उपलब्ध है, तब भी अगर हम हाथियों की मूवमेंट को ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक बात है। वन्यजीवों के हमले में इंसानों की जान जाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" अध्यक्ष ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार इस मामले को तत्काल गंभीरता से ले और वह इन जंगली हाथियों को रोकने के लिए क्या ठोस उपाय योजना करने जा रही है, इसकी पूरी जानकारी का विस्तृत निवेदन जल्द से जल्द सदन पटल पर रखे।
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