साहूकारी की 'बली' चढ़ा किसान: पहले जमीन छीनी, फिर विदेश भेजकर निकलवाई 'किडनी'; बेबस अन्नदाता की आखिरी गुहार- 'साहब, अब मौत दे दो!'
चंद्रपुर (नागभीड): अवैध साहूकारी का शिकंजा और प्रशासनिक लापरवाही किसी इंसान को मौत के दरवाजे तक कैसे ले जा सकती है, इसका रूह कंपा देने वाला उदाहरण चंद्रपुर जिले में सामने आया है। नागभीड तहसील के मिंथूर गांव के किसान रोशन कुडे ने साहूकार के उत्पीड़न से बचने के लिए कंबोडिया जाकर अपनी 'किडनी' बेच दी। लेकिन दुखद बात यह है कि इतना सब करने के बाद भी साहूकारों का आतंक खत्म नहीं हुआ है।
1 लाख के बदले 74 लाख का भुगतान, फिर भी जमीन छीनी
रोशन कुडे की व्यथा सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने साहूकार से केवल 1 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इस कर्ज के बदले वे अब तक 74 लाख रुपये चुका चुके हैं। फिर भी साहूकार की लालच खत्म नहीं हुई। लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर कुडे ने अपने अंग बेचने जैसा आत्मघाती कदम उठाया। किडनी बेचकर जो पैसे मिले, उन्हें देने के बाद भी कर्ज खत्म नहीं हुआ और साहूकारों ने उनकी पुश्तैनी खेती पर भी कब्जा कर लिया।
प्रशासन की 'सुस्त' कार्यप्रणाली पर सवाल
रोशन कुडे का आरोप है कि प्रशासन पूरी तरह मौन है। राज्य के बजट सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा अवैध साहूकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी संपत्ति जब्त करने के आदेश के बावजूद चंद्रपुर जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। शिकायत दिए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन आरोपी साहूकार आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।
"न्याय दो या मरने की इजाजत दो"
पिछले चार महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे रोशन कुडे अब पूरी तरह टूट चुके हैं। खेती छिन जाने से उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है। उनके पिता दिव्यांग हैं और परिवार दाने-दाने को मोहताज है। हताश होकर उन्होंने अब जिला कलेक्टर से 'इच्छामृत्यु' की अनुमति मांगी है और न्याय न मिलने पर मंत्रालय के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी है।
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