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Gadchiroli

Gadchiroli: स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, गंभीर मरीज को खाट पर 3 किमी पैदल ले गए ग्रामीण; उफनती नदी नाव से कराई पार


गडचिरोली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ तहसील में स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। बंगाडी गांव में एक गंभीर रूप से बीमार युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को आधी रात में तीन किलोमीटर तक खाट पर पैदल चलना पड़ा। इसके बाद उफनती नदी को टिन की नाव के सहारे पार कर मरीज को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना ने दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और संपर्क व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, बंगाडी गांव निवासी 29 वर्षीय संतोष जेट्टी की रविवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई और तत्काल इलाज की जरूरत पड़ी। लेकिन लगातार बारिश, खराब सड़कों और नदी-नालों में आई बाढ़ के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने उसे खाट पर लिटाया और मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में करीब तीन किलोमीटर का कठिन सफर तय कर नदी किनारे पहुंचे। वहां से मरीज को टिन की नाव के जरिए बाढ़ग्रस्त नाला पार कराया गया। इसके बाद उसे मुंधेनूर नाले के पास खड़ी ऑटो से लाहेरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे भामरागढ़ ग्रामीण अस्पताल रेफर किया, जहां से बेहतर इलाज के लिए हेमलकसा स्थित लोक बिरादरी प्रकल्प अस्पताल भेजा गया। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भामरागढ़ तालुका के कई गांवों का मानसून के दौरान संपर्क पूरी तरह कट जाता है। पुल और पक्के मार्ग नहीं होने के कारण हर वर्ष मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में जान जोखिम में डालनी पड़ती है। मुंधेनूर नाले पर पुल निर्माण का कार्य पिछले दो वर्षों से धीमी गति से चल रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

हालांकि, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने नाव के इस्तेमाल के दावे से इनकार किया है। उनका कहना है कि मानसून से पहले लाहेरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को विशेष लाइट वाहन उपलब्ध कराया गया था और मरीज को नाला पार कराने के बाद एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है।