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Nagpur

197 करोड़ का IITMS प्रोजेक्ट कछुआ चाल का शिकार, 171 में से सिर्फ 41 जंक्शनों पर ही पूरा हुआ काम; कैसे सुधरेगी ट्रैफिक समस्या?


नागपुर: शहर को जाम और ट्रैफिक की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए शुरू किया गया 'इंटेलिजेंट इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (IITMS) प्रोजेक्ट खुद लालफीताशाही और देरी के भंवर में फंस गया है। महीनों की देरी के बाद यह प्रोजेक्ट एक और डेडलाइन चूक गया है। शहर के कुल 171 ट्रैफिक जंक्शनों में से अब तक केवल 41 जंक्शनों पर ही काम पूरा हो सका है।

केरल की कंपनी 'केल्ट्रॉन' (Keltron) 14 फरवरी की समयसीमा चूकने के बाद 30 अक्टूबर तक का समय मांग रही थी, लेकिन नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने केवल 31 अगस्त तक का ही विस्तार दिया था। मियाद खत्म होने के बावजूद अधिकांश जंक्शनों पर काम अधूरा पड़ा है, जिससे पूरा सिस्टम चालू होने से अभी काफी दूर है।

अधूरे काम और देरी की मुख्य वजहें

  1. फ्लाईओवर और सड़क निर्माण की रुकावट: NMC के विद्युत विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फ्लाईओवर निर्माण और सड़कों के सीमेंटीकरण जैसे बुनियादी ढांचा कार्यों के चलते करीब 21 जंक्शनों पर काम प्रभावित हुआ है।
  2. 70 चौराहों पर काम शुरू भी नहीं: लगभग 140 स्थानों पर केवल फाउंडेशन (बुनियादी ढांचा) तैयार हो पाया है, जबकि 70 जंक्शनों पर काम की शुरुआत तक नहीं हो सकी है।
  3. स्मार्ट सिटी सिग्नलों का अधूरा इंटीग्रेशन: 171 में से 40 चौराहों पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कैंटिलीवर सिग्नल्स लगाए गए थे। केल्ट्रॉन को इन जगहों पर सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और अन्य काम पूरे करने थे, लेकिन अब तक शहरव्यापी नेटवर्क का एकीकरण अधूरा है।

IITMS प्रोजेक्ट का वित्तीय व तकनीकी ब्योरा

  • कुल प्रोजेक्ट लागत: 197 करोड़ रूपये
  • कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय): 107 करोड़ रूपये
  • ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M): 5 वर्ष के लिए
  • केल्ट्रॉन को NMC का भुगतान: लगभग 48 करोड़ रूपये
  • कंपनी पर लगाया गया जुर्माना: मात्र 25 लाख रूपये

41 जंक्शनों पर भी तालमेल की कमी
जिन 41 चौराहों पर काम पूरा बताया जा रहा है, वहां ट्रैफिक मॉनिटरिंग, गाड़ियों का घनत्व आंकने, धीमी गति वाले वाहनों की पहचान और ट्रैफिक उल्लंघन पकड़ने वाली तकनीक लगाई गई है। हालांकि, सिग्नलों का आपस में सही सिंक्रोनाइजेशन न होने के कारण वाहन चालकों को अभी भी बार-बार रुकना पड़ता है और समय की बर्बादी झेलनी पड़ रही है।