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पेपर लिक और लापरवाही के खिलाफ MPSC एस्पिरेंट्स का आंदोलन जारी, विपक्ष का महायुति सरकार पर हमला; टास्क फाॅर्स के गठन पर उठाये सवाल


नागपुर: महाराष्ट्र राज्य लोकसेवा आयोग द्वारा ली गई परीक्षा में लापरवाही सहित पेपर लिक का मुद्दा लगातार गहराता जा रहा है। राज्य भर में छात्र अपनी विभिन्न मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों के आंदोलन और मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने टास्क फ़ोर्स का गठन कर दिया है। वहीं इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी-शरद पवार पार्टी लगातार सरकार पर छात्रों के भविष्य से खेलने और बर्बाद करने का आरोप लगा रहे हैं। यही नहीं सभी छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए सरकार से मांगो को जल्द से जल्द मानने की मांग की। यही नहीं विपक्ष ने टास्कफोर्स के गठन पर भी सवाल उठाया। 

क्या करेगी टास्क फाॅर्स?- संजय राउत
शिवसेना नेता संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महायुति सरकार पर हमला बोला।राउत ने कहा, "इतनी बड़ी सरकार है, गृह मंत्री हैं, फिर भी पेपर लीक हो रहे हैं, बार-बार लीक हो रहे हैं। कल हजारों विद्यार्थी सड़कों पर उतर आए। टास्क फोर्स गठित करने की जरूरत क्यों पड़ी? पिछले दस वर्षों से राज्य में देवेंद्र फडणवीस का शासन है। फिर भी बच्चों के भविष्य से जुड़े पेपर लीक जैसे मामले सामने आ रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "दुर्भाग्य से कहना पड़ रहा है कि NEET हो या MPSC, या अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं, इन सभी पेपर लीक के रैकेट में भाजपा के कार्यकर्ता शामिल हैं। UPSC मामले में पुणे में लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं। टास्क फोर्स क्या करने वाली है? जिले-जिले में पुलिस व्यवस्था क्या कर रही है? एक और व्यवस्था खड़ी करने से काम बढ़ रहा है। किसी भी टास्क फोर्स के बिना लोकसेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया चलती थी, ऐसा मुझे लगता है।"

एमपीएससी अध्यक्ष का इतिहास काला
एनसीपी विधायक रोहित पवार ने एमपीएससी अध्यक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा, "MPSC के अध्यक्ष हैं, उन्होंने RTO आयुक्त रहते हुए जो काले कारनामे किए, उनके संबंध में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और सचिव को पत्र दिया था। यदि हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की चर्चा है, तो मुख्यमंत्री और राज्यपाल को इस मामले की जांच करनी चाहिए थी।"

पवार ने आगे कहा, "1997 में MPSC का पेपर लीक होने के बाद उस समय के अध्यक्ष जेल गए थे। NEET का पेपर लीक होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को घर जाना पड़ा था। MPSC एक स्वायत्त संस्था है। उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "वे कहते हैं कि दो महीने पहले पेपर लीक हुआ था। अगर खुद को बचाने के लिए ऐसा कह रहे हैं तो यह बहुत बड़ा घोटाला है। MPSC में यह साबित होता है कि जब आप वहां थे, तब भी अजीब तरह की गड़बड़ियां होती थीं। अधिकारियों की यह नैतिक जिम्मेदारी है। अगर वे इस्तीफा नहीं दे सकते तो मुख्यमंत्री से विनती है कि वे आगे आएं और स्वच्छ छवि वाले मुंढे साहब या झगड़े साहब को वहां नियुक्त करें।"

एनसीपी विधायक ने कहा, "विद्यार्थियों का MPSC पर विश्वास कैसे बढ़े, इसके लिए प्रयास करना जरूरी है। भीमानवार ने ऑनलाइन परीक्षा प्रक्रिया लाने का प्रयास किया था, जिसका सभी विद्यार्थियों ने विरोध किया था। उन्होंने कहा, "MPSC का पेपर पहली बार लीक होने पर हमने यह मुद्दा उठाया था। जब हम बोलते हैं तो सबूतों के साथ बोलते हैं। हमने सबूत दिए और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। जब MPSC कर्मचारियों की परीक्षा हुई, तब भी यही अधिकारी थे और उनके कार्यकाल में ही ये परीक्षाएं हुईं। अब क्या जांच होती है, हम देखेंगे। पवार ने तीन दिनों में निर्णय लेने नहीं तो राज्यभर में आंदोलन करने की चेतवानी भी दी।" 

सत्ताधारियों ने MPSC को भ्रष्ट स्वरूप दिया 
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर  MPSC को भष्ट्राचार का अड्डा बनाने का आरोप लगाया। वडेट्टीवार ने कहा, "वे आए उससे पहले या बाद में, हम MPSC की कुल मिलाकर इन सभी परीक्षाओं पर सवाल उठा रहे हैं। पेपर पहले लीक हुआ या बाद में? उनके कार्यकाल में भी कई बार परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है।

उन्होंने आगे कहा, "ऐसा बार-बार क्यों हो रहा है? इसके पीछे कौन है? अगर वे कह रहे हैं कि मैं साफ-सुथरा हूं, तो जो पहले जिम्मेदार थे, क्या उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे? उस समय उनकी सरकार थी।"

कांग्रेस  नेता ने  कहा, "सत्ताधारियों ने MPSC को भ्रष्ट स्वरूप देने का काम किया है। अगर इन सभी MPSC परीक्षाओं में काला बाजार चल रहा है, तो कल पुणे में छात्रों का जो आक्रोश देखने को मिला, वह इसी बात को दर्शाता है। नहीं तो बच्चे सड़कों पर क्यों उतरते? विद्यार्थी मर जाए तो चलेगा, लेकिन हम उनके साथ नहीं रहेंगे? विद्यार्थी बर्बाद हो जाए तो भी हम उनके साथ नहीं जाएंगे? ऐसे कुछ नालायक और निर्बुद्धि लोगों के दिमाग चलने लगे हैं।करेगी