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Nagpur

नागपुर की DJ बंदी पर सुप्रिया सुले का सरकार पर हमला, बोलीं- पूरे महाराष्ट्र में लागू हो नियम; मराठा-कुनबी संघर्ष सरकार की देन


नागपुर: नागपुर में DJ बंदी को लेकर चल रही सियासत के बीच NCP सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार से पूरे राज्य में DJ और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई की मांग की है। सुले ने कहा कि उत्सव मनाने और नाचने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन जश्न के नाम पर नियम-कानून की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रात 10 बजे के बाद DJ बजाने की अनुमति नहीं है। जब नागपुर में DJ पर प्रतिबंध लागू किया जा सकता है, तो मुख्यमंत्री को पूरे महाराष्ट्र में भी इसके प्रभावी अमल पर ध्यान देना चाहिए।

पुणे में DJ को लेकर निकाले जा रहे मोर्चे पर सुले ने कहा कि विवाद काफी आगे बढ़ चुका है और आने वाले दिनों में कई बड़े त्योहार हैं। ऐसे में सरकार को सभी पक्षों को साथ बैठाकर समझदारी से रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने पुणे की छवि को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि शिक्षा के माहेरघर के रूप में पहचाने जाने वाले पुणे की खबरें लगातार गलत और चिंताजनक वजहों से सामने आ रही हैं।

 'मनमर्जी से नहीं, नियम-कायदे से चलेगा जश्न'
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के DJ पर नाचने को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि नाचने या उत्सव मनाने का विरोध नहीं है। विरोध नियमों की अनदेखी का है। उन्होंने कहा कि उत्सव मनाइए, लेकिन नियम-कानून के मुताबिक। किसी पर हाथ उठाना भी स्वीकार नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों का जवाब शांतिपूर्ण तरीके से दिया जाएगा।

 संतोष चव्हाण के सत्कार पर भी सवाल
संतोष चव्हाण के सत्कार को लेकर सुले ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र एक सुसंस्कृत राज्य है और लोकमान्य तिलक ने जिन उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक उत्सवों की शुरुआत की थी, उन्हें भूलना नहीं चाहिए। सुले ने देश की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

 शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर सरकार को घेरा
शिक्षा मंत्री दादा भुसे को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। पेपर लीक और लगातार होने वाली प्रवेश परीक्षाओं को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। सुले ने कहा कि बच्चों को आखिर किस तरह की पढ़ाई करनी चाहिए, यह समझना मुश्किल हो गया है। उन्होंने शिक्षा को आम आदमी की पहुंच में रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। गुलाबराव पाटील के बयान पर सुले ने कहा कि वे सत्ता पक्ष में हैं और अगली बार मुख्यमंत्री से कहा जाना चाहिए कि वे अपने मंत्रियों को नियंत्रित करें।

 जरांगे के आंदोलन पर सरकार से आत्मचिंतन की मांग
मनोज जरांगे के अनशन और मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सुले ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मराठा, OBC और आदिवासी समाज सड़कों पर उतर रहे हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों में लगातार आंदोलन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि करीब 200 विधायकों के समर्थन वाली सरकार होने के बावजूद आंदोलन कम नहीं हो रहे हैं। सरकार को इस स्थिति पर आत्मचिंतन करना चाहिए।

मराठा-OBC विवाद पर उन्होंने सीधे सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य से लेकर केंद्र तक सत्ता में एक ही गठबंधन है। ऐसे में समाज में अगर तनाव और दरार पैदा हो रही है तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी सरकार की बनती है।

महिला, आदिवासी और युवाओं के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

आदिवासी छात्रों के आंदोलन को लेकर सुले ने कहा कि इन जिम्मेदारियों को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में अलग-अलग वर्गों के लोग अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। महिलाओं, आदिवासी छात्रों और 'लाडकी बहिण' योजना से जुड़े लोगों के मुद्दे भी सामने आ रहे हैं। सरकार को सभी पक्षों से बातचीत करनी चाहिए।

सूखे और किसानों के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांगा
महाराष्ट्र में सूखे की संभावित चुनौती को लेकर सुले ने कहा कि राज्य के सामने बड़ा संकट है। उन्होंने पिछली कर्जमाफी को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहली कर्जमाफी ही ठीक से लागू नहीं हुई। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

'विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी'
एल नीनो और पर्यावरण के सवाल पर सुले ने कहा कि नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। पेड़ों की कटाई और छंटाई से पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। वहीं, जनगणना को उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और विभिन्न पालकमंत्रियों के मंत्रालय में समय नहीं देने के सवाल पर कहा कि यह सवाल मुख्यमंत्री से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि सरकार के मुखिया वही हैं।

पीएम मोदी के 'नाराज फूफा' वाले बयान पर सुले ने कहा कि जिस तरह बोलने की ताकत होनी चाहिए, उसी तरह सुनने की ताकत भी होनी चाहिए। वहीं, मोदी के 'सच-झूठ' वाले बयान पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि वे किसके लिए बोल रहे थे। इंडिया गठबंधन में महिला नेतृत्व के सवाल पर सुले ने कहा कि आगे या पीछे कौन है, इससे फर्क नहीं पड़ता। जरूरी यह है कि देश की सेवा के लिए सभी काम करें। उन्होंने एक बार फिर देश की आर्थिक स्थिति को चिंताजनक बताते हुए उस पर ध्यान देने की जरूरत बताई।