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Maharashtra

दादा भुसे के अधिकारों में बड़ी कटौती, स्कूलों से जुड़े अहम फैसले अब अधिकारियों के हाथ; वडेट्टीवार का समर्थन, बोले- मंत्री छात्रों के विरोधी


मुंबई/नागपुर: महाराष्ट्र के शालेय शिक्षा मंत्री दादा भुसे के अधिकारों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। शालेय शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों के अधिकार अब मंत्री स्तर से हटाकर विभाग के प्रधान सचिव और शिक्षा आयुक्त को सौंप दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। 

सरकार के नए निर्णय के तहत स्वयंअर्थसहायित स्कूलों में नई कक्षाओं और शाखाओं को मंजूरी देने, मौजूदा स्कूलों में कक्षा या तुकड़ी बढ़ाने तथा विभिन्न शिक्षा बोर्डों से संबद्धता के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने जैसे महत्वपूर्ण अधिकार अब अधिकारियों के पास होंगे।

किन अधिकारों में हुआ बदलाव?
नई व्यवस्था के तहत स्वयंअर्थसहायित स्कूलों में नई तुकड़ी या शाखा को मंजूरी देने की जिम्मेदारी शिक्षा आयुक्त के पास होगी। वहीं, मौजूदा स्कूलों में कक्षाओं के विस्तार के लिए इरादा पत्र या मान्यता पत्र जारी करने का अधिकार प्रधान सचिव को दिया गया है। इसके अलावा मुंबई, ठाणे, पुणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवड़, नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर जैसे महानगरपालिका क्षेत्रों में CBSE, ICSE, IB और IGCSE जैसे शिक्षा बोर्डों से संबद्धता के लिए NOC जारी करने और उसका नवीनीकरण करने की जिम्मेदारी भी प्रधान सचिव को दी गई है। अन्य क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी शिक्षा आयुक्त संभालेंगे।

सरकार ने बताई ये वजह
सरकार की ओर से अधिकारों के इस बदलाव के पीछे 'विकसित महाराष्ट्र 2047', 100 प्रतिशत ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक कामकाज में तेजी व पारदर्शिता जैसे कारण बताए गए हैं। सरकार का कहना है कि निर्णय प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।

दादा भुसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शालेय शिक्षा मंत्री हैं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी नेताओं में माने जाते हैं। ऐसे में उनके विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकारों को अधिकारियों के पास स्थानांतरित किए जाने के फैसले को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार ने इसे प्रशासनिक सुधार से जुड़ा फैसला बताया है। इस फैसले पर दादा भुसे की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

छात्रों के विरोध में मंत्री
वहीं राज्य सरकार के लिए निर्णय का कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने समर्थन किया है। भूसे को छात्र विरोधी बताते हुए वडेट्टीवार ने कहा, "शिक्षक मंत्री के खिलाफ राज्य में रोष है। उन्होने कई विवादित निर्णय लिया है। उनके कई निर्णय छात्रों के विरोध में हैं, इसके कारण युवाओं को उनके खिलाफ रोष है।" वडेट्टीवार ने कहा कि, छात्रों के आंदोलन के कारण भाजपा में डर का माहौल है। इसी के कारण यह निर्णय लिया गया ऐसा मुझे लगता है।" कांग्रेस नेता ने भूसे की क्षमता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हुए कहा कि, "जब समिति बनाकर और अधिकारीयों के माध्यम से ही निर्णय लेना है तो मंत्री का क्या काम? उन्हें हटाया क्यों नहीं जा रहा। जब कोई निर्णय लेने की क्षमता नहीं तो उन्हें मंत्री मंडल में रखना का क्या फायदा।"