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Nagpur

'कैबिनेट में रहकर OBC का नुकसान बर्दाश्त न करें, सड़कों पर उतरें', विजय वडेट्टीवार की छगन भुजबळ को सीधी चुनौती


नागपुर: महाराष्ट्र में ओबीसी समाज के हकों और आरक्षण के मुद्दे को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर ओबीसी वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कैबिनेट मंत्री छगन भुजबळ को सीधी चुनौती दी है। वडेट्टीवार ने कहा कि भुजबळ अब केवल सत्ता में बैठकर बयान देने के बजाय ओबीसी के अधिकारों के लिए सीधे सड़कों पर उतरें। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मंत्रिमंडल में भुजबळ के रहते हुए ओबीसी समाज का नुकसान होता है, तो समाज उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। वडेट्टीवार ने कहा कि भुजबळ वर्षों से इस समाज का नेतृत्व कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पूरे राज्य में आंदोलन खड़ा करना चाहिए और विपक्ष इस लड़ाई में उनका पूरा साथ देगा।

वडेट्टीवार ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर मंडराते खतरे को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरपंच, जिला परिषद और नगर परिषद जैसी संस्थाओं में सरकार के फैसलों की वजह से ओबीसी वर्ग की सीटें घट रही हैं। इसके अलावा उन्होंने स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे के प्रशासनिक अधिकारों में कटौती किए जाने पर भी सवाल खड़े किए और इसे उनकी कार्यक्षमता पर अविश्वास करार दिया।

छात्रों के शैक्षणिक मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रशासन में भारी पक्षपात चल रहा है। एक तरफ कुछ खास वर्गों के लिए एयर-कंडीशनर वाले छात्रावास बनाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ओबीसी छात्रों को रहने के लिए साधारण हॉस्टल तक मुहैया नहीं कराया जा रहा। उन्होंने बताया कि छात्रों की छात्रवृत्ति की रकम लंबे समय से अटकी है और 'स्वाधार योजना' का पैसा सालभर से न मिलने के कारण गरीब छात्रों की पढ़ाई संकट में पड़ गई है। साथ ही अन्य निगमों को हजारों करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद ओबीसी महामंडल को जरूरी फंड से वंचित रखने पर उन्होंने सरकार की वित्तीय नीतियों की कड़ी आलोचना की।


भुसे के अधिकारों में कटौती को लेकर भी सरकार पर सवाल

स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे के कुछ महत्वपूर्ण अधिकारों में कटौती कर उन्हें प्रधान सचिव और शिक्षा आयुक्त को सौंपने के फैसले पर भी विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर सवाल उठाए। स्वयं वित्तपोषित स्कूलों की नई कक्षाओं और शाखाओं को मंजूरी देने के साथ ही विभिन्न शिक्षा बोर्डों से संबद्धता के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने के अधिकार अब प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए हैं।

सरकार का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक कामकाज को तेज और सुचारु बनाने के लिए लिया गया है। हालांकि, वडेट्टीवार ने इसके पीछे किसी अन्य वजह की संभावना जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या शिक्षा मंत्री के फैसले विवादों में आने के कारण सरकार ने उनके अधिकारों का दायरा कम किया है। वडेट्टीवार ने कहा, “अगर मंत्री सक्षम हैं तो उन्हें अधिकार देकर निर्णय लेने दें। सक्षम नहीं हैं तो उन्हें हटा दें। इस तरह अधिकारों में कटौती करना उनकी क्षमता पर ही सवाल खड़ा करता है।”


 ‘व्यवस्था के अंदर के लोगों की भी हो जांच’- वडेट्टीवार

MPSC की औषधि निरीक्षक पद की परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर भी वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा। आरोपी गौरव पाटील के घर में मंत्री नरहरि झिरवाळ के OSD गणेश देवरे के किराए पर रहने की खबर पर उन्होंने सावधानी बरतते हुए कहा कि केवल किसी अधिकारी के आरोपी के घर में किराए पर रहने से उसका सीधे पेपर लीक से संबंध जोड़ना उचित नहीं है।

हालांकि, वडेट्टीवार ने मांग की कि गौरव पाटील के तार आखिर कहां तक जुड़े हैं, इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल किसी बाहरी व्यक्ति की मदद से संभव नहीं हो सकता। प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके बाहर जाने तक सरकारी तंत्र के किसी व्यक्ति की भूमिका की संभावना की भी जांच की जानी चाहिए।

वडेट्टीवार ने कहा, “केवल एक व्यक्ति को पकड़कर जांच खत्म करना गलत है। पेपर लीक की पूरी श्रृंखला की जांच होनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की कई घटनाओं से गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को बड़ा नुकसान हुआ है। अगर यह धारणा बनने लगे कि पैसे और प्रभाव रखने वाले छात्रों को ही अवसर मिल रहा है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं से छात्रों का भरोसा पूरी तरह उठ सकता है।