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Nagpur

‘जरांगे पाटील का इस्तेमाल कर अब सरकार ने छोड़ा’, संजय राऊत का बड़ा आरोप; गरबा विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने साधा निशाना


नागपुर: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील के उपोषण को लेकर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राऊत ने महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राऊत ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव के दौरान जरांगे पाटील के आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाया और अब उनका उपयोग खत्म होने के बाद उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि जरांगे पाटील का उपोषण अब सरकार के लिए ‘गले का फांस’ बन गया है।

संजय राऊत ने कहा कि मनोज जरांगे पाटील की तबीयत खराब हो रही है, लेकिन उनकी ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। उन्होंने इसे बेहद अमानवीय बताया और कहा कि सरकार को जरांगे पाटील से बातचीत करनी चाहिए। बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकल सकता है, लेकिन इसके लिए पहले सरकार को चर्चा के लिए आगे आना होगा।

गरबा विवाद पर भी सरकार को घेरा
महाराष्ट्र में गरबा और दांडिया में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर भी संजय राऊत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री विदेशों में जाते हैं तो वहां की मस्जिदों में जाते हैं, दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों से गले मिलते हैं और उन्हें अपना भाई बताते हैं। ऐसे में मुस्लिमों को दांडिया खेलने से रोकने की बात क्यों की जा रही है? राऊत ने कहा कि ‘वहां भाई और यहां दुश्मन’ वाली राजनीति नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और देश सभी जाति-धर्म के लोगों के योगदान से आगे बढ़े हैं।

अमृता फडणवीस के बयान का किया स्वागत
संजय राऊत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के गरबा विवाद पर दिए बयान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अमृता फडणवीस ने जो भूमिका रखी है, वह स्वागत योग्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमृता फडणवीस को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके मंत्रियों को भी समझाना चाहिए कि महाराष्ट्र के निर्माण में सभी समुदायों का योगदान रहा है।

राऊत ने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इस आंदोलन में मुस्लिम समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता ‘बेगडी हिंदुत्ववादी’ बनकर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्यारे खान को लेकर भाजपा पर सवाल
अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान को लेकर भी राऊत ने भाजपा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा के नेता मुस्लिमों को दांडिया खेलने से रोकने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर प्यारे खान जैसे व्यक्ति को लेकर सामने आए विवाद पर भाजपा की भूमिका स्पष्ट नहीं है। राऊत ने कहा कि इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सरकार के मंत्रियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अजित पवार की भाजपा के साथ जाने पर बोले राऊत
अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस और भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर संजय राऊत ने कहा कि अजित पवार के भाजपा के साथ जाने के पीछे उनकी अपनी मजबूरी थी। उन्होंने कहा कि मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना शरद पवार ने की थी और शरद पवार भाजपा के साथ कभी नहीं जाएंगे। हालांकि, राऊत ने यह भी कहा कि किसी पार्टी का विलय एकतरफा नहीं हो सकता। इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होती है।

राहुल नार्वेकर पर भी निशाना
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर हमला बोलते हुए संजय राऊत ने कहा कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून पर बोलना शोभा नहीं देता। राऊत ने शिवसेना के मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह का फैसला नार्वेकर ने शिवसेना के मामले में दिया, उसके बाद उनके मुंह से दल-बदल विरोधी कानून की बात अच्छी नहीं लगती।


‘धनुष्यबाण का फैसला तुरंत होना चाहिए’

शिवसेना के चुनाव चिह्न ‘धनुष्यबाण’ को लेकर भी राऊत ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस मामले में फैसला जल्द होना चाहिए था। राऊत ने आरोप लगाया कि दूसरे गुट ने जिस धनुष्यबाण चुनाव चिह्न पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़े, उसे शिवसेना ने वर्षों की मेहनत से घर-घर तक पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि यह चुनाव चिह्न दूसरे गुट को ‘फ्री में’ मिल गया और उसका चुनाव में फायदा उठाया गया। राऊत ने मांग की कि धनुष्यबाण चुनाव चिह्न को फ्रीज किया जाना चाहिए।