नाबालिगों को गाड़ी देना पड़ा भारी, इस साल 26 अभिभावक दोषी करार; 30,000 का जुर्माना और 1 साल के लिए ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड
नागपुर: नागपुर शहर में नाबालिग बच्चों को दोपहिया या चारपहिया वाहन सौंपने वाले अभिभावकों और वाहन मालिकों पर अदालत और ट्रैफिक पुलिस का शिकंजा कस गया है। अदालत ने इस साल अगस्त तक ऐसे 26 मामलों में अभिभावकों और वाहन मालिकों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। दोषी पाए गए प्रत्येक व्यक्ति पर 30,000 रूपये का भारी जुर्माना लगाया गया है और उनका ड्राइविंग लाइसेंस 12 महीने (एक साल) के लिए निलंबित कर दिया गया है।
कड़ी कानूनी धाराओं में कार्रवाई
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 199A के तहत ₹25,000 का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा धारा 180(4) के तहत लाइसेंस रद्द करने और अतिरिक्त दंडात्मक राशि को मिलाकर कुल जुर्माना ₹30,000 पहुंचता है।
अभिभावक भी सीधे जिम्मेदार: डीसीपी ट्रैफिक
नागपुर ट्रैफिक पुलिस डीसीपी (ट्रैफिक) आदित्य मिरखेलकर के नेतृत्व में शहर भर में नाबालिग चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। पुलिस का स्पष्ट रुख है कि नाबालिग के गाड़ी चलाने पर जिम्मेदारी सिर्फ बच्चे की नहीं होती, बल्कि वाहन सौंपने वाले अभिभावक या मालिक की भी उतनी ही कानूनी जवाबदेही है। अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों के पास न तो ड्राइविंग का अनुभव होता है और न ही आपातकालीन ट्रैफिक स्थितियों को संभालने की परिपक्वता, जिससे सड़क पर दूसरों की जान भी जोखिम में पड़ती है।
आंकड़ों पर एक नजर:
- 2025 से अब तक: 125 से अधिक अभिभावकों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
- पिछले साल (2025): कुल 77 अभिभावकों पर मामले दर्ज किए गए थे।
- इस साल अगस्त तक: 48 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 33 थी।
ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों और अभिभावकों से पुरजोर अपील की है कि वे हादसों की रोकथाम और सड़क सुरक्षा के हित में किसी भी सूरत में नाबालिगों को गाड़ियां चलाने न दें।
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