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Nagpur

सोनेगांव आमराई में 61 पेड़ों की कटाई के खिलाफ चिपको आंदोलन, वरिष्ठ नागरिकों ने पेड़ों को राखी बांधकर बचाने का लिया संकल्प


नागपुर: नागपुर के सोनेगांव आमराई जंगल में 61 पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव का विरोध अब तेज होता जा रहा है। युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों के बाद अब वरिष्ठ नागरिक भी पेड़ों को बचाने की लड़ाई में उतर आए हैं। "सेव सोनेगांव आमराई ग्रुप" के बैनर तले वरिष्ठ नागरिकों ने पेड़ों से चिपककर ‘चिपको आंदोलन’ किया और राखी बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया।

नागपुर महानगरपालिका द्वारा सोनेगांव आमराई जंगल क्षेत्र में 61 पेड़ों को काटने के लिए जारी किए गए प्रस्ताव का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इस प्रस्ताव के खिलाफ अब वरिष्ठ नागरिकों ने भी मोर्चा खोल दिया है। "सेव सोनेगांव आमराई ग्रुप" के नेतृत्व में करीब 61 वरिष्ठ महिला और पुरुष नागरिकों ने पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन किया।

इस दौरान महिलाओं ने 61 पेड़ों को भाई मानते हुए उन्हें राखी बांधी और 61 दीपकों से उनका औक्षण कर संरक्षण का संकल्प लिया। नागरिकों का कहना है कि सोनेगांव आमराई का यह घना जंगल उनके बचपन से जुड़ा हुआ है और वर्षों से यह क्षेत्र मॉर्निंग वॉक, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक विरासत का केंद्र रहा है।

महानगरपालिका के अनुसार सहकार नगर घाट से मुलिक कॉम्प्लेक्स तक मलवाहिनी (सीवरेज लाइन) बिछाने के दौरान ये 61 पेड़ बाधा बन रहे हैं। इनमें बबूल, नीम, करंज, बेल, जामुन, पलाश, इमली और एक वटवृक्ष सहित कई प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। मनपा के रिकॉर्ड में इनमें 3 हेरिटेज और 58 गैर-हेरिटेज पेड़ बताए गए हैं।

हालांकि स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनसुनवाई और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पाइप और निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचा दी गई है, जिससे पेड़ों की कटाई को लेकर जल्दबाजी दिखाई दे रही है। 2 जून को इस मामले में जनसुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें 200 से अधिक नागरिकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

पर्यावरण प्रेमियों और वरिष्ठ नागरिकों की मांग है कि मलवाहिनी का मार्ग बदला जाए और इसे पास के नाले या पोहरा नदी के मार्ग से ले जाया जाए, ताकि पेड़ों को काटने की आवश्यकता न पड़े। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि इस क्षेत्र में कई दुर्लभ, प्रवासी पक्षियों और मोरों का नियमित आवागमन होता है। ऐसे में पेड़ों की कटाई से स्थानीय जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ेगा। नागरिकों ने महानगरपालिका से प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर पेड़ों की कटाई का निर्णय रद्द करने की मांग की है।