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ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था 'वेंटिलेटर' पर: नागपुर के मौदा में 87 और कामठी में 35 पद रिक्त, आक्रोशित अभिभावकों ने दी आंदोलन की चेतावनी


नागपुर: सरकार की 'सर्व शिक्षा अभियान' जैसी तमाम बड़ी योजनाओं और दावों के बावजूद नागपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिला परिषद (ZP) स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण कई स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि मौदा और कामठी तालुका के ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों के कुल 122 पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

मौदा तहसील: 12 स्कूलों में ताला जैसे हालात, 87 पद खाली

मौदा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में जिला परिषद के कुल 125 स्कूल हैं। नियमों के मुताबिक यहां 371 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में केवल 284 शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि अकेले मौदा तालुका में 87 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तालुका के 12 स्कूलों में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। प्रशासन अन्य स्कूलों के शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर भेजकर काम चलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।

कामठी तहसील: 35 पद रिक्त, माध्यमिक स्कूल हुए बंद

कामठी तहसील की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। यहां कुल 77 जिला परिषद प्राथमिक स्कूल हैं। नियमों के अनुसार यहां 249 शिक्षक होने चाहिए, लेकिन सिर्फ 214 शिक्षक ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कामठी में शिक्षकों के 35 पद खाली होने के कारण माध्यमिक स्कूल बंद पड़ चुके हैं।

एक ही शिक्षक पर कई कक्षाओं का बोझ

शिक्षकों की भारी किल्लत के कारण एक ही शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है (बहुवर्गीय अध्यापन)। तालुका स्तर से जिला परिषद प्रशासन को बार-बार पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रिटायर्ड शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि इस लचर व्यवस्था के कारण छात्रों का भारी शैक्षणिक नुकसान हो रहा है।

गरीब और किसान परिवारों के बच्चों का भविष्य दांव पर

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले दो से तीन साल से शिक्षकों के खाली पद नहीं भरे गए हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों, खेतिहर मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। निजी स्कूलों की भारी-भरकम फीस वहन करने में असमर्थ इन परिवारों के लिए जिला परिषद स्कूल ही एकमात्र सहारा हैं। अभिभावकों ने रोष व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि "अगर स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो हमारे बच्चे कैसे पढ़ेंगे और उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?"

अभिभावकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिला परिषद स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए। यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने जल्द ही स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की, तो ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।