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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन: आंदोलन हुआ सफल; जानें पूरा विवाद


नागपुर: अंबाझरी स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन को लेकर पिछले 272 दिनों से आंबेडकर के अनुयायी आंदोलन कर रहे थे। वह लगातार परिसर को निजी हाथों में देने और उसके बाद भवन को गिराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे। इतने दिनों से सुरु लड़ाई आज बुधवार को समाप्त हो गई। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से भवन निर्माण करने का ऐलान किया। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि, भविष्य में कोई निर्णय को अदालत में चुनौती न दे सकें। 


पहले जान लेते हैं क्या है सांस्कृतिक भवन विवाद?

सन 1975 में नागपुर महानगर पालिका ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आम जनता तक पहुंचाने की दृष्टि से अंबाझरी स्थित 20 एकड़ में सांस्कृतिक भवन का निर्माण किया गया। शुरुआत में इसका इस्तेमाल आंबेडकर के विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जाता रहा। हालांकि, समय के बाद इसका इस्तेमाल बंद हो गया। पिछले 20 सालों से इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। यहाँ ईमारत खली पड़ी होने के कारण खँडहर में तब्दील हो गई। 


2017 में बदला जमीन मालिकाना 

1975 से लेकर 2017 तक भवन की जमीन पर नागपुर महानगर पालिका का हक़ था। 1975 में यहां बौद्ध परिषद्हा का बह आयोजन किया गया था। हालांकि, 2017 में राज्य सरकार ने इसका मालिकाना बदलते हुए मनपा की जगह महाराष्ट्र राज्य पर्यटक विकास महामण्डल को सौंप दिया गया। 


एम्यूज़मेंट पार्क बनाने का लिया निर्णय 

राज्य में देवेंद्र फडणवीस सरकार के दौरान अंबाझरी के विकास करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, 2019 में सरकार बदल गई। फडणवीस की जगह उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने लेकिन अंबाझरी के विकास का निर्णय को आगे बढ़ाया गया। 2019 में राज्य सरकार और एम्यूज़मेंट पार्क का निर्माण करने वाली कंपनी गरुड़ के बीच एमओयू भी साइन कर लिया गया। इसके लिए 2021 में कोरोना के समय सरकार ने जमीन की उपयोगिता बदलने का काम शुरू किया। 


मामला पहुंचा अदालत के दरवाजे 

सरकार के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया। महानगर पालिका और एनआईटी ने सरकार के निर्णय का विरोध किया। कई संस्थाओं ने निर्णय के विरोध में अदालत में याचिका भी लगाई। आंबेडकर वादियों ने भवन की जगह को बनाए रखने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया। वहीं 2022 में अचानक भवन गिर गया।  आंदोलनकारियों ने इसको लेकर एम्यूज़मेंट पार्क बनने वाली कंपनी गरुड़ को जिम्मेदार बताया। हालांकि, कंपनी ने कहा कि, बारिश के कारण यह गिरा है। 


राजनीतिक दल भी आंदोलन में कूदे 

भवन गिरने के बाद यह मामला राज्य की राजनीतिक में केंद्र बिंदु पर आ गया। वहीं तब तक राज्य में दोबारा सत्ता बदल चुकी थी। एकनाथ शिंदे की अगुवाई में शिवसेना और भाजपा की सरकार आ चुकी थी। जिस महाविकास अघाड़ी ने अपने शासन के दौरान पार्क को बनाने का निर्णय लिया, वहीं अब वह इसका विरोध करना शुरू कर दिया। कांग्रेस समेत तमाम दलों ने एम्यूज़मेंट पार्क बनाने का विरोध शुरू किया। इस विरोध में भाजपा के स्थानीय नेता भी शामिल रहे। 


सरकार ने गरुड़ कंपनी के काम पर लगाई रोक 

आंदोलन के बढ़ते समय और लोगों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने गरुड़ कंपनी को दिए काम पर रोक लगा दी। जिला धिकारी कार्यालय द्वारा आदिसूचना के अनुसार, सरकार ने अगले आदेश तक गरुड़ को दिए काम पर रोक लगा दी है। सरकार के इस निर्णय के बाद आंदोलन कर रहे कई संस्थानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, कई लोग अभी भी आंदोलन कर रहे थे। जिन्होंने आज उपमुख्यमंत्री फडणवीस की घोषणा के बाद आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान कर दिया।