logo_banner
Breaking
  • ⁕ नागपुर स्नातक सीट की मतगणना से पहले विवाद, स्ट्रांग रूम के सीसीटीवी डेढ़ घंटे बंद रहने का दावा ⁕
  • ⁕ गर्मी से पहले नागपुर में जल संकट की आहट, नवेगांव खैरी में 8.23, तोतलाडोह में 4.75 प्रतिशत घटा पानी ⁕
  • ⁕ Akola: पानी के इस्तेमाल पर पाबंदी, बर्बादी करने पर काटा जाएगा नल कनेक्शन ⁕
  • ⁕ Amravati: राजहंस दूध एजेंसी पर FDA की कार्रवाई, कोजागिरी पूर्णिमा के मद्देनजर खाद्य पदार्थों की जांच तेज ⁕
  • ⁕ Nagpur: एयरपोर्ट पर रिक्शाचालक और सुरक्षा जवानों में विवाद, पार्किंग को लेकर शुरू हुई बहस मारपीट तक पहुंची ⁕
  • ⁕ Nagpur: दिघोरी के यश अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद नवजात की मौत, आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज ⁕
  • ⁕ किसानों की आत्महत्या पर प्रकाश आंबेडकर का विवादित बयान, बोले- पहले 10 नेताओं को मारो, फिर मरो! ⁕
  • ⁕ नागपुर अधिवेशन के खर्च में ₹42 करोड़ की बढ़ोतरी, खर्च ₹86.90 करोड़ से बढ़कर ₹129.05 करोड़ रुपये ⁕
  • ⁕ लाडकी बहनों को ₹3,000 रुपये का इंतजार, सितंबर-अक्टूबर की किस्त अटकी! ⁕
  • ⁕ Yavatmal: दिग्रस में शादी का झांसा देकर धर्मांतरण के लिए दबाव डालने का आरोप, तीन लोगों पर मामला दर्ज ⁕
Nagpur

पद्मश्री मिलने के पास पहली बार नागपुर पहुंचे डॉ. खुणे, जीरो माइल यूथ फाउंडेशन ने किया सत्कार 


नागपुर: झाड़ीपट्टी रंगभूमि के विख्यात कलाकार "झाड़ीपट्टी के दादा कोंडके" के रूप में जाने जाने वाले डॉ. परशुराम खुने को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। पद्म श्री मिलने के बाद डॉ. खुणे शुक्रवार को पहली बार नागपुर पहुंचे। जहां जीरो माइल यूथ फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत और अभिनंदन किया। 

डॉ परशुराम गढ़चिरौली जिले के कुरखेड़ा तहसील के गुरनोली के निवासी हैं। उवह पिछले 50 वर्षों से झाड़ीपट्टी रंगभूमि के विख्यात कलाकार हैं। उन्होंने कला (नाटक) के क्षेत्र में 5000 से अधिक नाटकों में 800 विभिन्न भूमिकाएँ निभाई हैं। उनकी कला है ही योगदान रहे जो उन्हें "झाड़ीपट्टी के दादा कोंडके" कहा जाने लगा। कलाकार के साथ वह राजनेता भी रहे। वह अपने गांव में 15 साल सरपंच और पांच साल उपसरपंच रहे। 

झाड़ीपट्टी प्रशंषको को पुरस्कार समर्पित 

इस कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. खुणे ने पद्मश्री पुरस्कार झाड़ीपट्टी के प्रशंषको को समर्पित किया। इसी के साथ उन्होंने अपनी यात्रा, नाटकों की रोचक कहानियां और झाडिपट्टी थिएटर के बारे में जानकारी दी। इस दौरान भव बावनकर, श्रीमती तृप्ति गिर्हे, डॉ. सौरभ निमकर, डॉ. किशोर नैतम, डॉ. सुशांत चिमनकर, डॉ. सौरभ मोहोद, नागपुर विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य सुनील फड़के और डॉ. किशोर इंगले आदि मौजूद रहे।