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Nagpur

पारसिवनी का लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय 'मुख्यमंत्री मेरी स्कूल, सुंदर स्कूल' अभियान में जिले में आई अव्वल, राज्य शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर द्वारा सम्मानित


नागपुर: नागपुर में 4500 हजार से अधिक स्कूले हैं. लेकिन आदिवासी आबादी वाले पारशिवनी के लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय मुख्यमंत्री के सपनों के स्कूल को साकार करने में सफल रहा है। भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मुख्यमंत्री मेरी स्कूल, सुंदर स्कूल अभियान में लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय ने नागपुर जिले में प्रथम और विभाग में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके चलते प्रदेश के स्कूली शिक्षा एवं खेल मंत्री दीपक केसरकर द्वारा सम्मानित किया गया।

बनाई बाल संसद

इस विद्यालय ने राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वित मुख्यमंत्री मेरी स्कूल, सुंदर स्कूल अभियान में भाग लिया था। इस अभियान के तहत विद्यालय में पहले से मौजूद विद्यार्थियों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया में बाल संसद बनाकर प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाना, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कौशल विकास के माध्यम से निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी विद्यार्थियों की भागीदारी को बढ़ाया गया. साथ ही व्यावसायिक शिक्षा, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, समेत अन्य गतिविधियों में माता-पिता, पूर्व छात्रों और  नागरिकों की भागीदारी को भी शामिल किया गया है। यही नहीं स्कूल ने उद्यान, जल संचयन, स्कूल की सजावट, प्रत्येक कक्षा में महापुरुषों के नामों की पहचान, श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता जैसी पहल भी की गयी है।

इन पहलुओं पर खरी उतरी स्कूल

मुख्यमंत्री सुंदर विद्यालय अभियान में स्कूलों का चयन करते समय विद्यालय भवन, विद्यालय का शैक्षणिक स्तर, विद्यालय के विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर, उनके बुद्धि एवं कला कौशल और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं जैसे कई शैक्षणिक बिंदुओं पर विचार किया जाता है. इसके बाद ही उनकी जांच की गयी. इस सब पहलुओं पर पारशिवनी तहसील के आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय और जूनियर कॉलेज खरा उतरा और राज्य सरकार की ओर से विभागीय प्रतियोगिता में स्कूल को दूसरा स्थान हासिल किया। जबकि नागपुर जिले में अव्वल रहा. यही वजह है की आज शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल की प्रशंसा की जा रही है।

प्राकृतिक सुंदरता से घिरा है स्कूल

दरअसल, यह स्कूल परिसर प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है। स्कूल की भव्य इमारत पेंच आने वालो का ध्यान आकर्षित करती है। पारशिवनी के बाबुलवाड़ा गांव में यह स्कूल है और यहां किसानों और खेत मजदूरों के बच्चे पढ़ते हैं।

लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय एवं जूनियर कॉलेज की प्राचार्य राजश्री उखरे ने बताया, “हम शुरू से ही प्रतिस्पर्धा के उद्देश्य से नहीं बल्कि स्कूल से ही विद्यार्थियों में संस्कार विकसित करने का प्रयास करते हैं। व्यक्तित्व विकास, श्रमदान का महत्व, स्वच्छता के प्रति जागरूकता, पर्यावरण जागरूकता जैसी गतिविधियां वर्ष भर चलायी जाती हैं। इस प्रतियोगिता में हमें उनका सहयोग मिला. विद्यार्थियों ने कक्षा को रंगों से सजाया। शिक्षकों की कड़ी मेहनत और स्कूल निदेशक के मार्गदर्शन से हम यह सफलता हासिल कर पाये।”