मानव-वन्यजीव संघर्ष का खौफनाक सच: 5 साल में 675 तेंदुए और 187 बाघों की मौत
नागपुर: महाराष्ट्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले पाँच वर्षों में राज्य में 675 तेंदुओं और 187 बाघों की मौत होने के आंकड़े सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार तेंदुओं की मौत के प्रमुख कारण सड़क हादसे, प्राकृतिक कारण, बिजली का करंट और शिकार बताए गए हैं।
महाराष्ट्र में वन्यजीवों की मौत को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जानकारी के अधिकार के तहत सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर द्वारा वन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में राज्य में 675 तेंदुओं की मौत हुई है। इनमें से 198 तेंदुए सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए, जबकि 320 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं। इसके अलावा 17 तेंदुए शिकार का शिकार बने और 12 की मौत बिजली के करंट से हुई।
वहीं इसी अवधि में राज्य में 187 बाघों की भी मौत दर्ज की गई है, जो तेंदुओं की तुलना में लगभग तीन गुना कम है। बाघों की मौत का सालवार आंकड़ा देखें तो 2023 में सबसे ज्यादा 52 बाघों की मौत हुई।
वन विभाग के अनुसार तेंदुओं की मौत के सबसे ज्यादा मामले पुणे वन परिक्षेत्र में 181 दर्ज किए गए, जबकि नाशिक वन विभाग में 161 तेंदुओं की मौत हुई। मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले खासकर जुन्नर क्षेत्र में अधिक देखने को मिले, जहां 2025 में तेंदुओं के हमलों में पाँच लोगों की मौत हो गई थी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने उसी वर्ष 68 तेंदुओं को पकड़ा, लेकिन माणिकडोह लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर की क्षमता पूरी होने के कारण 50 तेंदुओं को गुजरात के ‘वनतारा’ प्रोजेक्ट में स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया।
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