प्रसिद्ध गाना 'तुम तो ठहरे परदेसी' लिखने वाले गीतकार जहीर आलम का निधन, नागपुर के निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस
नागपुर: 'तुम तो ठहरे परदेसी' जैसे कालजयी गीत के रचयिता और विदर्भ के जाने-माने गीतकार जहीर आलम का रविवार रात नागपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर से संगीत और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
गिनीज बुक में दर्ज हुआ था 'वो' जादुई गीत
90 के दशक में जहीर आलम ने 'तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे...' गीत लिखकर इतिहास रच दिया था। अल्ताफ राजा की आवाज में सजे इस गाने ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल की, बल्कि सबसे ज्यादा बिकने वाली कैसेट के रूप में 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में भी अपना नाम दर्ज कराया। आज भी यह गीत संगीत प्रेमियों के बीच उतना ही लोकप्रिय है।
एम्प्रेस मिल से शब्दों के जादूगर तक का सफर
मूल रूप से नागपुर के मोमिनपुरा इलाके के रहने वाले जहीर आलम एक बेहद संवेदनशील रचनाकार थे। उन्होंने नागपुर की प्रसिद्ध 'एम्प्रेस मिल' में काम करते हुए अपना लेखन जारी रखा। संघर्षों के बावजूद उन्होंने साहित्य और संगीत के प्रति अपना समर्पण कम नहीं होने दिया।
सफलता मिली, पर श्रेय और आर्थिक स्थिरता का रहा अभाव
जहीर आलम ने 'तुम तो ठहरे परदेसी' के अलावा 'शहर का मौसम ठीक नहीं है, लौट चलो अब गाँव...' जैसे कई दिल को छू लेने वाले गीत लिखे। हालांकि, उनके मित्रों और प्रशंसकों को हमेशा इस बात का मलाल रहा कि वैश्विक स्तर पर इतनी बड़ी सफलता मिलने के बावजूद उन्हें वह आर्थिक स्थिरता और श्रेय नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।
सांस्कृतिक जगत में अपूरणीय क्षति
नागपुर के सांस्कृतिक और साहित्यिक गलियारों में जहीर आलम के निधन को एक युग का अंत माना जा रहा है। अपनी लेखनी और सादगी से लोगों का दिल जीतने वाले आलम अपनी गज़लों और गीतों के माध्यम से हमेशा प्रशंसकों की यादों में जीवित रहेंगे।
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