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Nagpur

विकास ठाकरे ने महामेट्रो प्रबंध निदेशक बृजेश दीक्षित के सेवा विस्तार का किया विरोध, मुख्यमंत्री शिंदे को लिखा पत्र


नागपुर: कांग्रेस शहर अध्यक्ष और विधायक विकास ठाकरे (Vikas Thakre) ने महामेट्रो के प्रबंधक बृजेश दीक्षित (Brijesh Dixit) के सेवा विस्तार का विरोध किया है। बुधवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath shinde) को पत्र लिखकर ठाकरे ने दीक्षित की जगह किसी अन्य रेल अधिकारी को प्रबंधक बनाने के की मांग की है। अपने पत्र में कांग्रेस नेता ने दीक्षित पर अधिकारियों से समन्वय नहीं रखने और मेट्रो के काम की गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप भी लगाया है। 

ठाकरे ने अपने पत्र में लिखा कि, “जब से दीक्षित को महामेट्रो का प्रभार दिया गया, तब से लगातार उनको लेकर कई तरह की शिकायत सामने आ रही है। दीक्षित के कार्यकाल के दौरान अनुचित योजना, घटिया गुणवत्ता वाले कार्यों के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। साथ ही मेट्रो की प्रारंभिक भर्ती के संबंध में भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं।”

दीक्षित ने शहर का नाम किया बदनाम 

ठाकरे ने कहा, “मेट्रो वर्तमान में घाटे में चल रही है लकिन इसके बावजूद दीक्षित ने अपनी प्रसिद्धि के लिए अलग से फंड जारी किया हुआ था। इसी के साथ इनका किसी भी सरकारी विभागों और अधिकारीयों के समन्वय नहीं है। इसक कारण मेट्रो सहित नागरिको को परशानी का सामना करना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा, “विभिन्न निविदाओं में अनियमितता, निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, कई ठेकेदारों को लाभ, स्टेशनों के लिए स्थान का गलत चयन, स्टेशनों के निर्माण में देरी और अन्य कई दोषों के लिए और नागपुर शहर का नाम बदनाम करने के लिए दीक्षित जिम्मेदार हैं।”

हर साल मनपा कमिश्नर का तबादला पर दीक्षित का नहीं 

ठाकरे ने अपने पत्र में लिखा ," भारतीय रेलवे की सेवाओं से सेवानिवृत्त होने के बावजूद दीक्षित को महामेट्रो के प्रबंध निदेशक के रूप में जारी रखा गया था। वह पिछले आठ वर्षों से एक ही कंपनी में काम कर रहा है जो कि एक बहुत बड़ी अवधि है। महाराष्ट्र सरकार तीन साल पूरे होने के बाद अधिकारियों को एक विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरित करती है। नागपुर नगर निगम में नगर आयुक्तों के तबादले हर साल होते रहे हैं। महामेट्रो के नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति पांच साल से अधिक के लिए प्रबंध निदेशक के पद पर नहीं रह सकता है।"

उन्होंने आगे कहा, “केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, 62 वर्ष की आयु के बाद विस्तार नहीं दिया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति को 65 वर्ष की आयु के बाद प्रबंध निदेशक के रूप में जारी नहीं रखा जा सकता है। दीक्षित नियमों का उल्लंघन करते हुए पिछले आठ वर्षों से प्रबंध निदेशक के पद का आनंद ले रहे हैं। इसलिए दीक्षित को सेवा विस्तार नहीं देना चाहिए और उनकी जगह भारतीय रेलवे में मंडल रेल प्रबंधक की क्षमता के एक अधिकारी को नियुक्त किया जाना चाहिए।”