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Nagpur

स्मार्ट सिटी नागपुर में कचरे का अंबार: पॉश इलाके बदहाल, मनपा के दावों के साथ नागरिकों के 'सिविक सेंस' पर उठे सवाल!


नागपुर: देश के सबसे स्वच्छ और आधुनिक शहरों में गिना जाने वाला नागपुर आज अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। चमचमाती मेट्रो, फ्लाईओवर और बड़ी-बड़ी बुनियादी परियोजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच, शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शहर के सबसे व्यस्त, पॉश और प्रमुख कारोबारी इलाकों में सड़कों के किनारे कचरे के पहाड़ खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति देखकर हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि जब शहर के सबसे हाई-प्रोफाइल और व्यापारिक क्षेत्रों की यह दुर्दशा है, तो आम रिहायशी इलाकों और बस्तियों की सुध लेने वाला कौन होगा?

वीआईपी इलाकों में बदबू का साम्राज्य, मनपा के दावे फेल
रामदासपेठ, वीरेंद्र स्टेडियम, सिविल लाइंस और धरमपेठ जैसे नागपुर के सबसे पॉश इलाकों में जगह-जगह लगा कचरे का अंबार प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि मनपा द्वारा संचालित करोड़ों रुपये की सफाई व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है। कई क्षेत्रों में कचरा संकलन वाहन समय पर नहीं पहुंचते, जिसके कारण भीषण गर्मी और उमस में कचरा सड़कों पर ही सड़ रहा है। इससे उठने वाली असहनीय दुर्गंध ने नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है और आसपास का पूरा वातावरण प्रदूषित हो चुका है।

घरों का कचरा सड़कों पर फेंक रहे लोग, कहाँ गया 'सिविक सेंस'?
इस पूरी अव्यवस्था के लिए जितनी जिम्मेदार महानगरपालिका है, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार खुद शहर के नागरिक हैं। यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है कि लोग अपने घरों और दुकानों को तो शीशे की तरह साफ रखते हैं, लेकिन वहां का सारा कचरा समेटकर बड़ी ही बेशर्मी से सार्वजनिक सड़कों पर फेंक आते हैं।

नागरिकों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया उनके 'सिविक सेंस' (नागरिक समझ) पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिस शहर में हम रहते हैं, सांस लेते हैं, उसे इस तरह कूड़ेदान बना देना बेहद निंदनीय है। स्वच्छता केवल मनपा कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है; जब तक नागरिक अपनी इस गंदी आदत को नहीं सुधारेंगे, तब तक करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी शहर कभी साफ नहीं हो सकता।

बारिश में बढ़ सकता है महामारी का खतरा
मानसून की शुरुआत हो चुकी है और सड़कों पर बिखरा यह भारी मात्रा में कचरा और प्लास्टिक बारिश के पानी के साथ बहकर सीधे नालियों में जा फंसेगा। इससे शहर की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह चोक होने की आशंका है। अगर समय रहते यह कचरा नहीं हटाया गया, तो सड़कों पर जलभराव तो होगा ही, साथ ही शहर में संक्रामक बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाएगा।

अब दावों से नहीं, डंडे से सुधरेगी बात
मनपा ने शहर में जगह-जगह डस्टबिन और कचरा पेटियां लगाई हैं, लेकिन जब लोग जानबूझकर नियमों की धज्जियां उड़ाने पर तुले हों, तो अब प्रशासन को सख्त रुख अपनाना ही होगा। नागपुर के प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि सड़कों पर सरेआम कचरा फेंकने वाले ऐसे लापरवाह लोगों के खिलाफ मनपा प्रशासन को तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई ही अब ऐसे लोगों का 'सिविक सेंस' ठिकाने ला सकती है, ताकि स्मार्ट सिटी नागपुर की साख और रैंकिंग को बचाया जा सके।