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Nagpur

Nagpur: सेना ने 28 मंजिला इमारत के निर्माण पर जताई आपत्ति, हाई कोर्ट में दायर की याचिका


नागपुर:  सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित 28 मंजिला इमारत के खिलाफ भारतीय सेना ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की है। यह याचिका मुख्यतः सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रस्तुत की गई है, क्योंकि इमारत सेना के एक प्रतिष्ठान से 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री के समक्ष हुई।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार की 2015 की शैडो एंड शिल्ड काउज नीति के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में आठ मंजिल से अधिक ऊँची इमारतों का निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, याचिका में दावा किया गया है कि इस इमारत के निर्माण के लिए सेना से आवश्यक एनओसी लिया गया।

मनपा ने इस मामले में शपथ पत्र पेश किया है, जिसमें सभी आरोपों का खंडन किया गया है। मनपा का कहना है कि 25 अगस्त 2023 को इस इमारत को ऑक्यूपेसी सर्टिफिकेट दिया गया था और 2001 की विकास योजना के अनुसार यह क्षेत्र सुरक्षा बल या प्रतिबंधित क्षेत्र में नहीं आता है। मनपा ने यह भी कहा है कि इमारत के निर्माण में सभी आवश्यक एनओसी प्राप्त की गई थी, जिसमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और अग्निशमन विभाग की मंजूरी शामिल है।

जब सेना ने आपत्ति जताई, तब तक 25 मंजिलों का काम पूरा हो चुका था और अधिकांश फ्लैट बिक चुके थे। मनपा ने यह सवाल उठाया है कि सेना को आपत्ति जताने में इतना समय क्यों लगा।

कोर्ट ने मनपा के शपथ पत्र को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2024 को निर्धारित की है। इस मामले में आगे की स्थिति का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें सुरक्षा और विकास के नियमों का पालन करने की बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।