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असली अल्पसंख्यक कौन? सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले बोले- अब कांसेप्ट पर पुनर्विचार करने की जरूरत


नागपुर: देश में अल्पसंख्यक कांसेप्ट पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। वर्तमान में केबल मुस्लिम और ईसाईयों को अल्पसंख्यक माना जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि, मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं है और उन्हें नहीं माना जाना चाहिए। रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने यह बात कही। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, संघ में भी बहुत सारे मुस्लिम कार्यकर्ता है। हम उन्हें दुनिया के सामने लाकर उनका प्रचार नहीं करना चाहते। 

होसबाले ने कहा, "मौजूदा समय में संविधान में  अल्पसंख्यक का जो कॉन्सेप्ट है उसमे पुनर्विचार करने की जरूरत है। अल्पसंख्यक कहने पर अलग होने होने की भावना होती है। देश सभी का है। पिछले कई सदियों से अपने स्वार्थ के लिए अल्पसंख्यक कहा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, "हिन्दू कोड बिल के अनुसार, जितने भी लोग है संघ उनका काम करती है।" 

सरकार्यवाह ने कहा, "मौजूदा समय में अल्पसंख्यक कहा तो मुस्लिम और ईसाई सामने आता है। गुरु गोलवलकर से लेकर मौजूदा सर संघचालक मोहन भागवत तक लगातार संवाद कर रहे हैं। मौजूदा समय में संघ के अंदर दोनों धर्मों के कई लोग स्वयं सेवक के रूप में काम कर रहे हैं। लेकिन हमें उन्हें शो पीस की तरह सामने पेश नहीं करना है।"

सरकार्यवाह होसबाले ने कहा, "हम सभी को राष्ट्रीयता से हिन्दू मानते हैं। लेकिन कुछ लोग जो खुद को धर्म और राष्ट्रीयता से हिन्दू नहीं मानते हैं। ऐसे लोगों से हम लगातार संपर्क साध रहे हैं। हम उनके पास जाते हैं वह हमारे पास आतें हैं। उन्होंने आगे कहा, "केरल में ईसाइयों, मुंबई में मुसलमानों के बीच हमारी बैठकें होती हैं। उन धर्मो के लोगों में संघ से बातचीत करने के लिए बेहद उत्साह है। जिसको देखते हुए हम लगातार उनसे मिलते और बात करते हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, अगर कोई उनके दरवाजे आता है तो उनके लिए दरवाजे खुले हुए हैं।"

मोदी सरकार के कामों को सराहा 

संघ में प्रधानमंत्री मोदी के 10 साल के कार्यकाल को सराहा है। होसबाले ने कहा, "चुनाव की घोषणा हो चुकी है। दो महीने बाद जनता उसपर अपना निर्णय देगी। हालांकि, विदेशों में देश की वह-वही हुई है, विकास दिखाई देरहा है। दुनिया कह रही है कि, मौजूदा सदी भारत की है। जी 20 के समय हमने देखा विदेशी मेहमान किस तरह भारत और उसके विकास के कामों सराहना की। 

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