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Nagpur

मरीजों की मौत के जिम्मेदार निजी हॉस्पिटल, मेडिकल डीन बोले- पैसे ख़त्म होने के बाद कर देते हैं सरकारी अस्पताल रेफर


नागपुर: नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में एक दिन में 44 मौतों की खबर से राज्य सहित देश में हड़कंप मचा हुआ है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमलावर है। इसी बीच नागपुर के मेडिकल और मेयो अस्पताल में हुई मौतों का मामला चर्चा में आ गया है। दोनों अस्पतालों में हुई मौतों का कारण दवाओं की कमी बताया जा रहा है। इसके बाद मेडिकल-मेयो प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं इन मौतों को लेकर मेडिकल के डीन डॉ. राज गजभिए ने निजी अस्पताल को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि, "प्राइवेट अस्पताल जब तक मरीज के परिजन के पास पैसे होते हैं, उन्हें वहां रखते हैं, जैसे ही पैसे ख़त्म होते हैं उन्हें सरकारी अस्पतालों में रेफर कर देते हैं। गंभीर हालत में आए कई मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो जाती है।"

पिछले 24 घंटे में मेयो और मेडिकल अस्पताल में 25 मरीजों की मौत हुई है जिसमें मेडिकल अस्पताल में 16 जबकि मेयो अस्पताल में 9 मरीजों का समावेश है। नांदेड़ और संभाजीनगर में हुई मौतों के कारण यह मुद्दा गरमाया हुआ है। वहीं नागपुर में मौतों की खबर आने के बाद दोनों सरकारी अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाये जाने लगे। नांदेड़ और संभाजीनगर की तरह नागपुर में भी दवाइयों की किल्लत के कारण मौत होने की चर्चा शुरू हो गई। वहीं इस खबर का खंडन करते हुए मेडिकल डीन डॉ. राज गजभिये ने यह बात कही।

डॉ.गजभिये ने कहा, "मेडिकल में 1900 बेड हैं। बड़ा अस्पताल होने के कारण यहाँ रोजाना 10 से ज्यादा मरीजों की मौत होती है। वहीं 14 जो मौत हुई यह सामान्य है, यह कहना की दवाइयां नहीं मिलने से मौत हुई है यह पूरी तरह झूठ और बेबुनियाद है।"

उन्होंने कहा, "सरकारी अस्पतालों में मौते होने का मुख्य कारण शहर में मौजूद निजी अस्पताल है। नागपुर शहर मध्य भारत का मेडिकल का हब माना जाता है। बड़ी संख्या में पड़ोसी राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए नागपुर पहुंचते हैं। कई मरीज सरकारी अस्पताल में नहीं पहुंचाते हुए सीधे प्राइवेट हॉस्पिटल में पहुंच जाते हैं। मरीज से इलाज के नाम पर लाखों रुपए लूट लेने के बाद जब मरीज की जान बचाने में असफल होते दिखाई देते हैं और अपने अस्पताल का नाम बचाने के लिए वह मरीजों को सरकारी अस्पताल में रेफर कर देते हैं।"

मेडिकल डीन ने कहा, "अपने मरीज को बचाने की आस में परिजन उन्हें मेडिकल और मेयो में भर्ती कराते हैं। गंभीर अवस्था में भर्ती मरीजों को बचाने का काम सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किया जाता है, लेकिन गंभीर स्थिति होने के कारण कई मरीजों की मौत हो जाती है। इस कारण सरकारी अस्पताल में मौतों की संख्या लगातर बढ़ती दिखाई देती है।" 

मेडिकल-मेयो में हुई आपात बैठक 

नांदेड के सरकारी अस्पताल में 24 घंटे में ही 44 मरीजों की मौत मामले में राज्य भर में खलबली मच गई है। सरकारी अस्पतालों में नियमित दवाओ की आपूर्ति नहीं होने से मरीजो को आए दिन समस्याओं से जूझना पड़ता है। नांदेड़ और संभाजी नगर में हुई घटनाएं नागपुर में ना हो इसके लिए मेडिकल अस्पताल और मेयो अस्पताल में मंगलवार को आपात बैठक ली गई। इस दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीजों को दी जा रही सुविधाओं के साथ ही अस्पताल में मौजूद दवाओं के स्टॉक के बारे में भी चर्चा हुई।

अस्पताल में दवाइयों की नहीं कोई कमी 

इस चर्चा के बाद मेडिकल अस्पताल के डीन  डॉ गजभिए ने पत्रकारों से  कहा की मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फिलहाल दवाइयां की कोई भी कमी नहीं है। दवाओ को खरीदने के लिए उन्हें सरकार से भी मदद मिली है। उनके डॉक्टर मरीज का हर संभव इलाज कर रहे हैं । यहां पर विदर्भ के अलावा पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में हर रोज मरीज आते हैं।