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Nagpur

RTMNU में 'उपकुलगुरु' नहीं, 'सुपरमैन' चाहिए: कुलगुरु को 5 महीने बाद भी नहीं मिला अपने 'लेवल' का कोई विद्वान!


नागपुर: कहते हैं हीरा बड़ी मुश्किल से मिलता है, लेकिन राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (Rashtrasant Tukdoji Maharaj Nagpur University) में तो हीरा ढूंढने की ऐसी जंग छिड़ी है कि पूरी यूनिवर्सिटी का सिस्टम ही 'कोहिनूर' की तलाश में स्वाहा होने की कगार पर है। कुलगुरू डॉ. मनाली क्षीरसागर (Dr. Manali Kshirsagar) को पद संभाले पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी को आज तक एक अदद 'उपकुलगुरु' (Pro-VC) नसीब नहीं हुआ। वजह बड़ी दिलचस्प और किसी फिल्मी डायलॉग जैसी है, "टक्कर या कहें लेवल का कोई मिल ही नहीं रहा!"

'मैच मेकिंग' की अनोखी चुनौती
विश्वविद्यालय के गलियारों में चर्चा है कि कुलगुरु को अब तक अपने 'टक्कर' का कोई सारथी नहीं मिला है। कुलगुरु का मानना है कि उनके साथ काम करने की रफ्तार और उनका वर्किंग लेवल इतना अलग है कि उसे छू पाना हर किसी के बस की बात नहीं। अब इसे कुलगुरु का आत्मविश्वास कहें या नागपुर के विद्वान प्रोफेसरों का दुर्भाग्य, लेकिन सच यही है कि विश्वविद्यालय के सैकड़ों अनुभवी शिक्षक और अधिकारी फिलहाल इस 'हाई-लेवल' कसौटी पर फिट नहीं बैठ पा रहे हैं।

सिस्टम 'वेटिंग' पर, तलाश 'हाई-लेवल' पर
एक तरफ प्रशासन का मानना है कि पद बहुत महत्वपूर्ण है (जो कि है भी), इसलिए किसी को भी नहीं बिठाया जा सकता। लेकिन दूसरी तरफ, इसी 'परफेक्ट' व्यक्ति के इंतजार में विश्वविद्यालय का हाल कुछ ऐसा है, 

  • छात्र मार्कशीट की गलतियां सुधारने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
  • परीक्षाएं और परिणाम अपनी 'पुरानी रफ्तार' से देरी का नया रिकॉर्ड बना रहे हैं।
  • प्रशासनिक काम का बोझ बढ़ रहा है, क्योंकि एक पहिया गायब है।
शायद यूनिवर्सिटी अब किसी ऐसे 'सुपरमैन' के आवेदन का इंतजार कर रही है, जो कुलगुरु के विजन को एक नजर में समझ ले और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ सके।

सवाल तो वाजिब है...
अब सवाल यह नहीं है कि पद कब भरेगा, सवाल यह है कि क्या नागपुर जैसे शिक्षा के केंद्र में वाकई प्रतिभाओं का ऐसा अकाल पड़ गया है? या फिर कुलगुरु की 'कार्यशैली का पैमाना' इतना ऊंचा है कि वहां तक पहुंचने के लिए विश्वविद्यालय के विद्वानों को अभी और तपस्या करनी होगी।

उम्मीद है कि कुलगुरु को उनके 'लेवल' का जोड़ीदार जल्द मिल जाए, ताकि 'परफेक्शन' की इस तलाश में कहीं छात्रों का भविष्य 'बॉटम लेवल' पर न चला जाए। अब देखना यह है कि यह तलाश उनके कार्यकाल में पूरी होती है, या यह पद 'मिस्टर या मिस परफेक्ट' के इंतजार में ऐसे ही सूना रहेगा।