logo_banner
Breaking
  • ⁕ Shardiya Navratri 2026: नागपुर सहित विदर्भ में नवरात्रि की धूम, देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर में बंद, खराब पुलिस चौकियों को मिलेगी नई ज़िंदगी! पुलिस प्रशासन का निर्णय ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Nagpur

Samruddhi Mahamarg: आठ महीने में विभिन्न दुर्घटओं में 101 की मौत, नींद आने से 44 की गई जान


नागपुर: समृद्धि महामार्ग लगातार चर्चाओं का विषय बना हुआ है। पहले जहाँ ख़राब निर्माण वहीं अब सड़क अपर होने वाली दुर्घटनाओं के कारण सवाल उठा रहे हैं। बीते आठ महीने में एक्सप्रेस-वे पर विभिन्न दुर्घटनाओं में 99 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से वाहन चालक को नींद आने के कारण 44 लोगों की मौत हुई है। वहीं ओवर स्पीड के कारण 33 की जान गई है। इस बात की जानकारी राज्य के अतिरिक्त महासंचालक रविंद्र सिंगल ने दी। सिंगल शुक्रवार को नागपुर दौर पर पहुंचे थे। जहां पुलिस परिक्षण स्कूल में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने यह सब बात बताई। 

बुलढाणा से वाशिम के बीच ज्यादा दुर्घटना 

सिंगल ने कहा, “वर्तमान में सड़क की गई जांच में कोई इंजीनियरनिंग फेलियर या अन्य कोई खामी सामने नहीं आई है। वहीं दुर्घटनाओं को लेकर जो जांच की गई है। वह बुलढाणा और  वाशिम के क्षेत्रों में ज्यादा दर्ज हुई है। दोनों जिलों के 200-300 किलोमीटर का जो क्षेत्र हैं, यहां अधिकतर घटना हुई है।”वहीं दुर्घटना में कमी लाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। सड़क के किनारे पेड़ लगाना, जरूरी फ्लैग्स सहित विभिन्न काम जिससे दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है इसके उपाय किये जा रहे हैं। इसी का परिणाम है बीते 25 दिनों में महामार्ग पर कोई हादसा नहीं हुआ है।

मृत्युंजय दूतों ने बचाई 1634 लोगों की जान

चर्चा के दौरान अतिरिक्त महासंचालक ने मृत्युंजय दूतों की खूब सराहना की। उन्होंने कहा, "राज्य में वर्तमान में कुल 3605 मृत्युंजय दूत हमारे साथ जुड़े हुए है। इन्होंने जीरो आवर  में तत्परता दिखाते हुए 892 दुर्घटनों में अपनी निस्वार्थ सेवा दी। इनमें कुल 2918 लोग घायल हुए जिनमें से 1634 लोगों को बचा लिया गया। हमारी ओर से भी मृत्युंजय दूतों को पूरा सहयोग किया जा रहा है।

शहरी क्षेत्रों में ज्यादा सड़क हादसे 

सिंगल ने कहा, “विभिन्न सर्वे में देखा गया है कि हाईवे या ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरों में अधिक एक्सीडेंट होते हैं. महाराष्ट्र में हाईवे पर ऐसे 1004 ब्लैक स्पाट मिले है जहां एक से 6 महीनों के भीतर 5 या इससे अधिक एक्सीडेंट हुए है. या फिर 10 से जाने गई है। नेशनल हाईवे हो या स्टेट हाईवे या फिर राज्य में किसी भी सड़क पर रील्स बनाने या स्टंट दिखाने के बाद मामला संज्ञान में आते ही आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किये जा रहे हैं।”