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Nagpur

सावनेर में बच्चों की जान से खिलवाड़? ऑटो और मारुति वैन में क्षमता से ज्यादा स्कूली बच्चों को बैठकर किया जा रहा परिवहन


आरटीओ, पुलिस और शिक्षा विभाग से तत्काल जांच की मांग; सामाजिक कार्यकर्ता हितेश बनसोड ने पूछा—‘कल कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?’

सावनेर: नागपुर जिले के सावनेर तहसील में स्कूली बच्चों की निजी ऑटो, मारुति वैन और अन्य वाहनों से आवाजाही को लेकर बच्चों की सुरक्षा का गंभीर सवाल उठ रहा है। शिकायतें हैं कि कुछ वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाकर ले जाया जाता है। यदि ऐसा हो रहा है, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए यह गंभीर खतरा बन सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं मृत्युंजय दूत हितेश बनसोड ने इस मामले में क्षेत्रीय परिवहन विभाग (आरटीओ), स्थानीय पुलिस और शिक्षा विभाग से तत्काल ध्यान देने की मांग की है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
हितेश बनसोड ने सवाल उठाया कि यदि क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जा रहे किसी वाहन के साथ दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना है कि किसी अनहोनी के बाद जांच करने के बजाय प्रशासन को पहले ही संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

बच्चों की सुरक्षित आवाजाही केवल यातायात का विषय नहीं, बल्कि अभिभावकों के विश्वास और प्रशासन की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। ऐसे में नियमों के उल्लंघन की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर पर जांच करना जरूरी है।

आरटीओ, पुलिस और शिक्षा विभाग संयुक्त जांच करें
हितेश बनसोड ने मांग की है कि सावनेर तहसील में स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले निजी ऑटो, मारुति वैन और अन्य वाहनों की विशेष जांच मुहिम चलाई जाए। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि वाहन आवश्यक अनुमति और दस्तावेजों के साथ संचालित हो रहे हैं या नहीं।

उन्होंने प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी हैं:

  • स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की विशेष जांच की जाए।
  • विद्यार्थियों की आवाजाही के लिए आवश्यक परमिट और अनुमतियों की जांच हो।
  • निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  • चालक का लाइसेंस, वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज जांचे जाएं।
  • स्कूल प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों की आवाजाही के लिए की गई व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई कर नियमित निरीक्षण किया जाए।
  • अभिभावकों को सुरक्षित स्कूली परिवहन के प्रति जागरूक किया जाए।

दुर्घटना होने का इंतजार न करे प्रशासन
हितेश बनसोड ने प्रशासन से सवाल किया कि जब विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नियम मौजूद हैं, तो उनकी प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो रही? उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि सड़कों पर उतरकर वाहनों की वास्तविक स्थिति की जांच करें।

उन्होंने कहा कि समय रहते उचित कदम उठाए जाएं, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। सावनेर में स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आरटीओ, पुलिस और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय जरूरी है।