logo_banner
Breaking
  • ⁕ Amravati: समृद्धि महामार्ग पर भीषण सड़क हादसा: चंद्रपुर के एक ही परिवार के 5 लोगों की मौके पर ही मौत ⁕
  • ⁕ लाडली बहन योजना में बड़ा खेल! 12 हजार सरकारी कर्मचारियों ने बटोरे पैसे; विधानसभा में सरकार ने कबूली चौंकाने वाली बात ⁕
  • ⁕ Nagpur: बजाजनगर के अवैध रेस्टोरेंट्स पर चलेगा बुलडोजर! हाईकोर्ट की फटकार के बाद फडणवीस सरकार ने खारिज की अपील ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र विधानसभा: मानसून सत्र के तीसरे दिन किसानों के लिए बड़ा ऐलान, 30 जून तक 56 लाख किसानों की कर्जमाफी ⁕
  • ⁕ NEET सेंटर विवाद में बड़ा ट्विस्ट! NTA बोली- अभ्यर्थी ने खुद चुना था एग्जाम सिटी"; पिता तालिब ने दावे को किया ख़ारिज ⁕
  • ⁕ अमरावती में भारी हंगामा: किरीट सोमैया की गाड़ी के आगे लेटे MIM कार्यकर्ता, पुलिस ने बल प्रयोग कर हटाया ⁕
  • ⁕ खड़ी निजी बस में लगी आग, टेकड़ी रोड के एमपी बस स्टैंड की घटना; परिसर में मचा हड़कंप ⁕
  • ⁕ विदर्भ सहित राज्य के 247 नगर परिषदों और 147 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित, देखें किस सीट पर किस वर्ग का होगा अध्यक्ष ⁕
  • ⁕ अमरावती में युवा कांग्रेस का ‘आई लव आंबेडकर’ अभियान, भूषण गवई पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ⁕
  • ⁕ Gondia: कुंभारटोली निवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद पर बोला हमला, ‘एक नारी सबसे भारी’ के नारों से गूंज उठा आमगांव शहर ⁕
Nagpur

40 साल पहले स्वीडिश दंपत्ति ने लिया गोद, अब अपनी असली मां को ढूढने नागपुर पहुंची महीला


नागपुर: उपराजधानी से एक अनोखा मामला सामने आया है। जहां 40 साल पहले एक वर्षीय अनाथ बच्ची को स्वीडिश संपत्ति ने गोद लिया और उसे लेकर स्वीडन लेकर चले गए। हालांकि, अब वह बच्ची बड़ी हो गई है और अपनी मां को ढूढने के लिए नागपुर पहुंची है। महिला का नाम एना पेट्रिशिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, एना का जन्म नागपुर के डागा अस्पताल में 28 फरवरी 1983 को हुआ था। हालांकि, मां बिन बिहाई थी इसलिए उसे वह शहर के श्रद्धानंद पेठ स्थित अनाथ आश्रम में छोड़कर चली गई। जिसके एक साल बाद स्वीडिश दंपति ने उसे गोद लिया और स्वीडन लेकर चले गए। हालांकि, 40 साल बाद वह अपनी मां को ढूंढने के लिए वापस नागपुर आईं हैं। 

अपनी जैविक मां को दोबारा ढूढने को लेकर ऐना ने कहा, "स्कूल में बच्चे समझाने लगते हैं कि उनके बाल उनकी मां की तरह हैं और नाक उनके पिता की तरह हैं। तब मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसा नहीं कर सकती। एक बच्चे के दृष्टिकोण से, आप अपनी तुलना अपनी माँ से नहीं कर सकते।  आपको बस एक ऐसी जगह पर रखा जाता है, जहां आप किसी और की तरह नहीं दिखते। तो यहीं से मेरे मन में (अपनी जैविक मां की खोज करने का) विचार आया।  मुझे उम्मीद है कि इससे कुछ और हासिल हो सकता है।"

हर जगह जा चुकी नहीं मिला कोई सुराग 

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, एना की मां का नाम शांता है और वह शांतिनगर की निवासी थी। ऐना ने कहा कि, नागपुर आने के बाद वह सबसे पहले शांतिनगर क्षेत्र में गई लेकिन उन्हें उनकी मां नहीं मिली। वह हर वह जगह जा चुकीं है, जहां से उनकी मां को लेकर कोई सबूत मिल सके। लेकिन वह खाली हाथ रह गई। वह श्रद्धानंद पेठ स्थित उस अनाथालय भी पहुंची जहां उनकी मां ने उन्हें छोड़ा था, लेकिन वह से भी निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि, ऐना ने कहा कि, जब तक मां नहीं मिल जाती तब तक वह वापिस नहीं जाएंगी।  

मां से कोई गीला शिकवा नहीं

ऐना सोमवार को अपनी मां को ढूंढने के लिए शहर के रेड लाइट एरिया भी गई, लेकिन वहां भी उन्हें कुछ नहीं मिला। ऐना ने कहा, वह तीन बच्चों की मां हैं, उन्हें भी पता है मां बच्चों के लिए क्या होती है। मुझे छोड़ने के लिए उनसे (जन्म देने वाली मां) कोई गिला शिकवा नहीं है। बस अपनी मां से मिलना चाहती हुं। उन्हें गले लगाना चाहती हूं। उनकी गोद में सोना चाहती हूं।"