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Viral: ट्रेनों को रवाना करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाता है रेलवे? वायरल वीडियो में दिखी सच्चाई


नागपुर: जमीनी हकीकत से दूर रेलवे की मनमानी नीतियों का एक नजारा नागपुर स्टेशन पर देखने को मिला जब ट्रेन 12792 दानापुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म 1 से रवाना हुई. मुश्किल से 5 मिनट रुकी ट्रेन के स्लीपर कोच में चढ़ रहे यात्री अपनी जान जोखिम डालते हुए नजर आए, क्योंकि कोच के दरवाजों पर भी कदम रखने की जगह नहीं थी. किसी जागरूक यात्री अमन सिद्दीकी पोहारी ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद उक्त सोशल हैंडल संभाल रहे कर्मचारी ने रटारटाया जवाब देकर आरपीएफ पर जिम्मेदारी ढकेल दी और रेलवे की इज्जत बचाने का असफल प्रयास किया. 

अमन ने अपने वीडियो में लिखा कि भारतीय रेलवे की सफलता का एक और उदाहरण नागपुर स्टेशन पर. उन्होंने अश्विनी वैष्णव, आईआरसीटीसी और रेल सेवा को टैग करते हुए बेहद कड़े शब्दों में इस घटना को सभी के लिए शर्मनाक बताया. लंबी दूरियों समेत कई ट्रेनों में स्लीपर कोच की कटौती के बावजूद उक्त ट्रेन में अब भी 8 स्लीपर कोच लगाए जा रहे हैं. 

हालांकि उक्त वीडियो में दिख रहा है कि ट्रेन रवाना होने के बाद 2 कोच के चारों दरवाजे पहले से पैक हैं.  वीडियो में दिख रहा है कि ट्रेन चलने पर 100 से ज्यादा यात्री ट्रेन में सवार होने की कोशिश कर रहे हैं. किसी के हाथ में पानी की बोतल है तो कोच से कम से 2 मीटर दूर ही है क्योंकि उसके आगे कई यात्री दौड़ रहे हैं. इस बीच ट्रेन की गति लगातार बढ़ रही है. यह नजारा देखकर वहां मौजूद अन्य सभी यात्रियों के गले सूख गये. किसी भी पल, कोई भी यात्री गेट से फिसलकर प्लेटफॉर्म और कोच के गैप से सीधे पटरियों में समा सकता था. 

भारतीय यात्री केन्द्र के सचिव बसंत शुक्ला ने कहा कि गर्मियों का सीजन शुरू हो चुका है. कुछ दिन बाद स्कूल और कॉलेजों की छुट्टियां भी शुरू हो जाएंगी. ट्रेनों में एक बार फिर भीड़ बढ़नी शुरू हो चुकी है जो अगले सप्ताह से सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी. उन्होंने रेलवे से कड़े सवाल करते हुए कहा कि दानापुर एक्सप्रेस की तरह उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली अन्य ट्रेनें भी पूरे वर्ष ही खचाखच चलती हैं. 

आखिर रेलवे इन ट्रेनों को स्टेशनों से रवाना करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाता है? क्या इन ट्रेनों में सवार यात्री स्टेशन पर रुकने के लायक नहीं रहते या उन्हें लंबे सफर के लिए पानी भरने का भी अधिकार नहीं? उक्त घटना में यदि किसी की जान चली जाती तो क्या रेलवे अपनी गलती मानता?