logo_banner
Breaking
  • ⁕ Shardiya Navratri 2026: नागपुर सहित विदर्भ में नवरात्रि की धूम, देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ त्योहारों पर नागपुर और न्यू अमरावती के यात्रियों को बड़ी राहत, मध्य रेलवे चलाएगा विशेष ट्रेनें ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
National

Old Pension Scheme: योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अहलूवालिया दिया बड़ा बयान, कहा- यह खुद को दिवालिया घोषित करने वाला कदम


नई दिल्ली: योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कुछ राज्य सरकारों द्वारा पुरानी पेंशन योजनाओं को लागू करने की जिद पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि, " निश्चित रूप से यह कदम मूर्खतापूर्ण और दिवालियापन का कार्य है।" अहलूवालिया शनिवार को एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में बोलते हुए अहलूवालिया ने कहा, “पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का विचार पूरी तरह से बेतुका है. ऐसा हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। फिर भी हम इस समय आर्थिक मोर्चे पर कई संकटों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के बारे में सोचना मूर्खता है।”

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी पेंशन योजना से वित्तीय दिवाला निकलेगा। नतीजतन देश की जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। व्यवस्था को राजनीतिक दलों या सत्ता में बैठे दलों को उन नीतियों को अपनाने से रोकना चाहिए जो आर्थिक संकट की ओर ले जाती हैं।