उद्धव ठाकरे के 'लोभ' वाले वार पर बच्चू कडू का पलटवार, बोले– 'सीएम बनने के लिए ठाकरे ने हमें दी थी कैबिनेट मंत्री पद की धोखेबाजी'
अमरावती: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) में आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर गरमा गया है। सत्ताधारी शिवसेना (Shivsena) के विधान परिषद सदस्य बच्चू कडू (Bachhu Kadu) ने शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर विश्वासघात का बड़ा आरोप लगाते हुए तीखा पलटवार किया है। बच्चू कडू ने दावा किया कि महाविकास अघाड़ी सरकार (Mahavikas Aghadi) के गठन के समय ठाकरे ने उन्हें बकायदा कैबिनेट मंत्री पद का शब्द (वादा) दिया था, लेकिन प्रत्यक्ष में उन्होंने वादाखिलाफी करते हुए उनके बजाय शंकरराव गडाख को कैबिनेट मंत्री बना दिया और उन्हें केवल राज्यमंत्री पद से ही संतोष करना पड़ा।
कडू ने ठाकरे को याद दिलाया कि एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने ही उनकी मुलाकात उद्धव ठाकरे से करवाई थी, जिसके बाद वे खुद ठाकरे के आवास पर गए और समर्थन की घोषणा की। कडू ने साफ शब्दों में कहा कि हमारे ही संख्याबल और वोटों की बदौलत उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे क्योंकि उन्हें खुद सीएम बनना था, इसलिए उन्होंने समर्थन के लिए हमसे गुहार लगाई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठाकरे ने उन्हें दिव्यांग मंत्रालय देने का वादा भी पूरा नहीं किया और वह विभाग भी गडाख को सौंप दिया।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शुक्रवार को बच्चू कडू के 'प्रहार' संगठन के सोलापुर, परभणी और धाराशिव जिले के कई प्रमुख कार्यकर्ताओं ने उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना (यूबीटी) का दामन थाम लिया। इन कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए उद्धव ठाकरे ने शिंदे गुट के टिकट पर विधान परिषद पहुंचे बच्चू कडू पर निशाना साधते हुए कहा था कि बच्चू कडू को घर बुलाकर मंत्री बनाना मेरी सबसे बड़ी भूल थी। वह पुराने शिवसैनिक ही थे, लेकिन पद और पैसे के लोभ में चले गए; खैर जो गए उन्हें जाने दो, कार्यकर्ता आज भी मेरे साथ हैं।
उद्धव ठाकरे के इसी बयान पर पलटवार करते हुए बच्चू कडू ने कहा कि ठाकरे मेरे बारे में जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह दिल से नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हमने आपको मुख्यमंत्री बनाया, तो क्या हम यह कहें कि हमसे भूल हो गई थी? कडू ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जब वे गुवाहाटी जा रहे थे, तब भी उन्होंने उद्धव ठाकरे को इस बारे में सूचित किया था और उनसे बात की थी, इसलिए ठाकरे अब शिवसेना में हुई बगावत का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार में बच्चू कडू अपनी 'प्रहार' पार्टी के इकलौते विधायक थे, इसके बावजूद ठाकरे मंत्रिमंडल में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। हालांकि, जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया, तो बच्चू कडू ने ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे का हाथ थाम लिया था और वे महाराष्ट्र से सीधे गुवाहाटी के होटल पहुंचे थे, जिससे ठाकरे सरकार को बड़ा झटका लगा था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि हाल ही में बच्चू कडू ने अपने 'प्रहार' संगठन का विलय सत्ताधारी शिवसेना में कर दिया है, जिसके बदले उन्हें विधान परिषद (एमएलसी) की उम्मीदवारी और विधायकी मिली है।
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