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Chandrapur

Chandrapur: मिराबाई ठेके पर मनपा में बवाल; जांच रिपोर्ट अटकी, स्थायी समिति बैठक रद्द


चंद्रपुर: चंद्रपुर महानगरपालिका की आज सोमवार को होने वाली स्थायी समिति की बैठक अचानक रद्द कर दी गई। खास बात यह है कि शहर में तकनीकी पद्धति से नाला सफाई का ठेका प्राप्त करने वाली संत मीराबाई सेवा सहकारी संस्था को लेकर पिछले कई दिनों से मनपा में जबरदस्त विवाद छिड़ा हुआ है। संस्था पर ठेका हासिल करते समय फर्जी दस्तावेज लगाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद स्थायी समिति सभापति मनस्वी गिऱ्हे ने पूरे मामले की जांच के आदेश देते हुए एक समिति गठित की थी। हालांकि, एक महीना बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है।

इस बीच हाल ही में हुई मनपा की आमसभा में भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। बैठक के दौरान कई नगरसेवकों के बीच तीखी बहस और शाब्दिक झड़प भी देखने को मिली। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नगरसेवकों के अपने ही दल के नगरसेवक  से मतभेद खुलकर सामने आए। पहले से ही गुटबाजी से जूझ रही मनपा राजनीति में अब संत मीराबाई संस्था के ठेके को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के भीतर “उपगुट” और “गुप्त गुट” बनने की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में अब कौन किसके साथ है और कौन किसके खिलाफ, यह समझना मुश्किल हो गया है।

कांग्रेस के स्थायी समिति सदस्य सचिन कत्याल ने संत मीराबाई संस्था के कथित फर्जी दस्तावेजों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मनपा में राजनीतिक घमासान तेज हो गया। भाजपा की महापौर संगीता खांडेकर संस्था के समर्थन में बताई जा रही हैं, जबकि उसी पार्टी के गुटनेता शेखर शेट्टी विरोध में नजर आ रहे हैं। वहीं उपमहापौर प्रशांत दानव ने भी संस्था के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।

चर्चा यह भी है कि महापौर समर्थक कुछ नगरसेवक संस्था के समर्थन में खड़े हैं, जबकि भाजपा गटनेता समर्थक नगरसेवकों ने विरोध की तलवार निकाल ली है। शिवसेना उबाठा के कुछ नगरसेवक भी संस्था के खिलाफ रुख अपनाए हुए हैं। वही शिवसेना उबाठा की एक महिला नगरसेविका ने इस विवाद से दूरी बनाना ही बेहतर समझा है, क्योंकि उनके पति का इस ठेके से संबंध होने की चर्चा मनपा गलियारों में चल रही है।

कांग्रेस में भी इस मुद्दे पर दो फाड़ दिखाई दे रही है। गुटनेता तथा सभागृह नेता राजेश अडूर इनकी संस्था के प्रति सौम्य भूमिका हैं, एसी चर्चा काँग्रेस के  ही नगरसेवकोमे मे हो रही है जबकि राहुल घोटेकर सहित कुछ नगरसेवक विरोध की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

शहर की नालियों और गटरों की मशीनों से सफाई के लिए दिया गया यह ठेका अब राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन चुका है। नालियों की सफाई के इस ठेके पर अब मनपा में एक-दूसरे की “राजनीतिक सफाई” करने की कोशिशें तेज होने लगी हैं।सबसे खास बात यह है कि जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है।

इस वजह से मनपा गलियारों में अब यह फुसफुसाहट भी सुनाई देने लगी है कि “शायद कागजातों की भी मशीन से सफाई की जा रही है।” जांच रिपोर्ट लंबित रहने के कारण  सोमवार की स्थायी समिति की बैठक रद्द किए जाने की चर्चा है। इससे साफ है कि नाली सफाई ठेके का मामला अब मनपा की राजनीति में बड़ा विस्फोटक मुद्दा बन चुका है।