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Maharashtra

राज्य में बिना लाइसेंस कृषि व्यापार करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई; विपणन मंत्री जयकुमार रावल की चेतावनी


मुंबई: महाराष्ट्र के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने किसानों के व्यापक हितों की सुरक्षा और कृषि उपज बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र कृषि उत्पन्न पणन (विकास व विनियमन) अधिनियम 1963 के तहत, राज्य में बिना लाइसेंस के शेतमाल की खरीद-बिक्री करने वाले व्यापारियों, संस्थाओं और शेतकरी उत्पादक कंपनियों के खिलाफ अब कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

पणन संचालनालय द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, व्यापारियों को समय-समय पर सूचित किए जाने के बावजूद कई क्षेत्रों में विनापरवाना लेनदेन की शिकायतें मिल रही थीं, जिसे रोकने के लिए अब बिना परमिट व्यापार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

शासन द्वारा 5 जुलाई 2016 और 31 दिसंबर 2025 को जारी संशोधित प्रावधानों के तहत, कृषि उत्पन्न बाजार समिति के कार्यक्षेत्र में व्यापार करने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य बना दिया गया है. हालांकि, इन लाइसेंस धारकों से बाजार शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन कानून के दायरे में रहने के लिए पंजीकरण आवश्यक होगा. मंत्री रावल ने चेतावनी दी है कि सीधे विपणन (Direct Marketing), निजी बाजार, किसान-उपभोक्ता बाजार और ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसे माध्यमों के लिए भी कलम 5 (ड) के तहत अनुमति लेना अनिवार्य है और नियमों का उल्लंघन करने वालों को कानूनी अंजाम भुगतना होगा.

इसके साथ ही, किसानों द्वारा उत्पादित गुणवत्तापूर्ण फलों और सब्जियों में मिलावट करने वालों के विरुद्ध भी प्रशासन ने युद्ध स्तर पर तैयारी कर ली है. जयकुमार रावल ने कहा कि फलों को कृत्रिम रूप से पकाने, उनमें मिठास बढ़ाने के लिए रसायनों का इंजेक्शन देने या सब्जियों को आकर्षक दिखाने के लिए कृत्रिम रंगों और घातक रसायनों का उपयोग करने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है.

ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए बाजार समितियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं. यदि कहीं भी मिलावट का संदेह होता है, तो अन्न व औषध प्रशासन (FDA) के साथ समन्वय कर खाद्य सुरक्षा और मानके कायदा 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें दोषियों के लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है.

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, कृषि उत्पादों के भंडारण और परिवहन में कम मोटाई वाले प्लास्टिक और थर्माकोल के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इसके स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

मंत्री रावल ने राज्य की सभी बाजार समितियों और निजी परवाना धारकों से अपील की है कि वे शासन के इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करें ताकि किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम मिले और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता न हो.