महाराष्ट्र सरकार ने निजी बिल्डरों को सौंपी करोड़ों की सरकारी जमीन? कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार का गंभीर आरोप
नागपुर: महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मीरा-भायंदर की 254.88 एकड़ सरकारी जमीन के स्वामित्व को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन निजी विकासकों (बिल्डरों) के हवाले करने की साजिश रची जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
वडेट्टीवार के अनुसार, मीरा-भायंदर की यह जमीन मूल रूप से राज्य सरकार की है। इसके बावजूद, बिना किसी पूर्व अनुमति के राजस्व रिकॉर्ड (अभिलेखों) में बदलाव किए गए। 30 अप्रैल 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए इस जमीन का मालिकाना हक 'मीरा सॉल्ट वर्क्स' के पक्ष में बरकरार रखा।
वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि जब सुनवाई केवल 'Jurisdiction' (अधिकार क्षेत्र) के मुद्दे पर होनी थी, तब मालिकाना हक का फैसला निजी कंपनी के पक्ष में कैसे आ गया? उन्होंने आगे कहा, ""क्या सरकारी वकील सो रहे थे? यह विधी विभाग की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। जनता की संपत्ति को निजी बिल्डरों के गले उतारने के लिए जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया में देरी की गई।"
सरकार की भूमिका पर सवाल
वडेट्टीवार ने कहा कि एक तरफ राज्य की तिजोरी खाली है, और दूसरी तरफ सरकार बेशकीमती जमीनें निजी हाथों में सौंप रही है। जब चौतरफा आलोचना शुरू हुई, तब सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही है। वडेट्टीवार ने पूछा कि हाई कोर्ट का फैसला आने तक प्रशासन क्या कर रहा था? क्या निजी बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए ही साक्ष्यों को मजबूती से पेश नहीं किया गया? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने में देरी करती है, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
विकास लवांडे पर हुए हमले की निंदा
इसी दौरान वडेट्टीवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता विकास लवांडे पर आलंंदी में हुई स्याही फेंकने की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे वारकरी संप्रदाय की आड़ में छिपे 'हिंसक तत्वों' की करतूत बताया और गृहमंत्री से हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।
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